बस्ती। जिले में 14 सीएचसी संचालित हैं। इन पर स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। ऐसे में यहां से गर्भवती अथवा महिला मरीज को रेफर कर दिया जाता है। यह अलग बात है कि स्वास्थ्य विभाग ने सभी सीएचसी पर गायनी के चिकित्सक की तैनाती का निर्देश दिया है, मगर डॉक्टरों की कमी के चलते यह संभव नहीं हो पा रहा है।
जिले में स्त्री रोग विशेषज्ञों की कमी है। यहां के 14 सीएचसी पर एक भी स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। इसका कारण 16 स्वीकृत पदों के सापेक्ष मात्र 4 स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए लगातार सीएमओ की ओर से पत्राचार किया जा रहा है, मगर अब तक इनकी तैनाती नहीं हो सकी है। जिले के हर्रैया में 100 बेड का महिला अस्पताल है। इसके बने करीब एक वर्ष बीत चुके हैं, मगर स्त्री रोग विशेषज्ञ की कमी के चलते इसका संचालन बाधित है। इस अस्पताल को फर्स्ट रेफरल यूनिट बनाया गया है। इसी प्रकार अन्य सीएचसी भी स्त्री रोग विशेषज्ञ का इंतजार कर रहे हैं। यहां गर्भवती को रेफर से काम चलाया जाता है।
जिला महिला अस्पताल में केवल दो स्थायी स्त्री रोग विशेषज्ञ
जिला मुख्यालय पर महिला अस्पताल संचालित है। डॉक्टरों की कमी की बात यहीं से शुरू करते हैं। यहां नौ पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष तैनाती मात्र 2 की है, जबकि दो महिला रोग विशेषज्ञ की संबद्धता अस्पताल की मांग को देखते हुए सीएमओ ने की है।
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महिला अस्पताल में 9 चिकित्सकों के स्वीकृत पद हैं। इसके सापेक्ष मात्र 4 स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। डिमांड भेजी गई है।
-डॉ. पीके श्रीवास्तव, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
जिले में 16 स्वीकृत पद के सापेक्ष मात्र 4 स्त्रीरोग विशेषज्ञ हैं। इनमें तीन स्थायी तो एक संविदा के चिकित्सक है। जिले के तीनों रेफरल यूनिट को कवर किया जा रहा है। रुधौली में तैनात चिकित्सक को जरूरत पर हर्रैया भेजा जाता है। शासन को चिकित्सक की कमी के बारे में अवगत कराते हुए पत्र भेजा गया है।
-डॉ. आरपी मिश्र, सीएमओ