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Basti News: डॉक्टर लखनऊ व फैजाबाद में .... मुन्ना भाई चला रहे अस्पताल

Sun, 25 Jun 2023 12:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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- मोटी कमाई के लालच में फंस रहे डॉक्टर, मरीजों को दे रहे धोखा
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- अपने नाम से रजिस्ट्रेशन के एवज में हर माह मुन्ना भाई से लाखों रुपये लेते हैं डॉक्टर



- कुसौरा, कलवारी, कप्तानगंज, हर्रैया, विक्रमजोत, अमोढ़ा, छावनी इलाके के 30 से 40 फीसदी अस्पताल






केस 1


फैजाबाद में सरकारी अस्पताल में कर रहीं ड्यूटी यहां लगी है डिग्री



छावनी स्थित शर्मा हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन मुन्ना भाई ने सरकारी चिकित्सालय में तैनात डॉ. सौम्या गोयल के नाम पर करा रखा था। जब हर्रैया में निजी चिकित्सालयों की जांच शुरू हुई तो पता चला कि डॉ. अग्रवाल फैजाबाद महिला अस्पताल में बतौर स्त्रीरोग विशेषज्ञ तैनात हैं। अस्पताल के संचालक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। अस्पताल को सील किया गया है।

केस 2



न जाने कहां के चिकित्सक के नाम पर करा लिया था पंजीकरण


कुसौरा बाजार में स्थित एक मुन्ना भाई ने अपने चिकित्सालय का रजिस्ट्रेशन ऐसे चिकित्सक के नाम पर करा रखा था जिसका कोई पता ठिकाना नहीं है। मामले में जब एक प्रसूता की मौत हुई तो हंगामा हुआ और इसके बाद स्वास्थ्य महकमे की नींद टूटी। जांच हुई तो पता चला कि जिस चिकित्सक के नाम पर अस्पताल का रजिस्ट्रेशन है उस नाम का कोई चिकित्सक अपने जिले में है ही नहीं। तत्काल रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी



बस्ती। ये दो केस तो महज बानगी हैं। ऐसे सैकड़ों अस्पताल मुन्ना भाई अपने जुगाड़ तंत्र से चला रहे हैं, जिनमें डॉक्टर अस्पताल में हैं ही नहीं और उनके नाम पर रजिस्ट्रेशन है।



ये डॉक्टर किसी और शहर में प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं और अपने नाम से रजिस्ट्रेशन के एवज में हर माह लाखों रुपये मुन्ना भाई से लेते हैं। इस बात का खुलासा भी हो चुका है। इसके बाद भी मुन्ना भाई और एमबीबीएस डॉक्टरों का गठजोड़ फल-फूल रहा है। मरीजों को धोखा देकर मोटी कमाई की जा रही है।



डॉक्टर मोटी कमाई के फेर में इस गठजोड़ का हिस्सा हैं। शहर के अलावा कुसौरा, कलवारी, कप्तानगंज, हर्रैया, विक्रमजोत, अमोढ़ा, छावनी इलाके के 30 से 40 फीसदी अस्पताल इसी तरह चलाए जाने की चर्चा स्वास्थ्य विभाग में खूब हो रही है।



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कमीशन के खेल में फेल है सिस्टम



इस खेल के एक अहम किरदार एंबुलेंस चालक भी हैं। अस्पताल में इलाज के लिए लाने पर मुन्ना भाई ने उनका कमीशन तय कर रखा है। एंबुलेंस चालक को मरीज के हिसाब से रुपये मिलते हैं। गंभीर सर्जरी वाले मरीजों का रेट सबसे अधिक है। ऐसे मरीज लाने पर एंबुलेंस चालकों को 10 से 15 हजार, छोटी सर्जरी वाले मरीजों के लिए 8 से 10 हजार और सामान्य मरीजों को लाने पर तीन से पांच हजार रुपये तय हैं। इसके लिए एंबुलेंस चालक जिले के विभिन्न कस्बों व ग्रामीण इलाकों के मरीजों को फांसते हैं। अच्छे इलाज का झांसा और जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में अधिक भीड़ दिखाकर मरीजों को निजी अस्पतालों में पहुंचा देते हैं।
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शपथ पत्र देने का है नियम



अस्पताल के पंजीकरण के दौरान जिस डॉक्टर का नाम रहता है, वह शपथ पत्र देता है। शपथ पत्र में इस बात का जिक्र रहता है कि वह अस्पताल में बैठेगा और मरीजों का इलाज करेगा। इसके अलावा इमरजेंसी में किसी भी समय इलाज के लिए उपलब्ध रहेगा। लेकिन शपथ पत्र देने के बाद भी बड़ी संख्या में डॉक्टर अपने नाम से पंजीकृत अस्पतालों में नहीं बैठ रहे हैं।
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