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मरीज माफिया : अपने बनकर सपने दिखा पहुंचा देते हैं निजी अस्पताल

Sun, 03 Sep 2023 12:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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बस्ती। सरकारी अस्पतालों में सक्रिय मरीज माफिया व्यवस्था की जड़ तक अपनी पैठ बना चुके हैं। यहां आए मरीजों को बरगला कर बिना बताए निजी अस्पतालों में ले जाया जा रहा है। अस्पतालों से लामा (बिना चिकित्सकीय सलाह के जाने वाले) मरीजों के आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। जिला महिला चिकित्सालय में ती महीने में लामा मरीजों की संख्या 104 है। जबकि जिला अस्पताल में इस तरह के मरीजों की संख्या एक महीने में 500 है। वहीं, तीन महीने में ओपेक कैली से 610 मरीज बिना किसी सूचना के अस्पताल से चले गए। पड़ताल में सामने आया कि इस कारगुजारी में अस्पताल के लोग भी मरीज माफिया का बखूबी साथ दे रहे हैं।
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जिला महिला चिकित्सालय और जिला अस्पताल दोनों जगहों पर यह खेल चल रहा है। इन मरीज माफिया की जाल में फंसने वाले ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले ज्यादातर मरीज होते हैं। इनके बहकावे में प्रतिदिन 20 से 25 मरीज आते हैं। झांसे में आकर निजी अस्पताल पहुंचे मरीज के तीमारदारों से इलाज के नाम पर जमकर उगाही की जाती है। इसमें इन दलालों का अच्छा खासा कमीशन शामिल रहता है।
ओपीडी से लेकर इमरजेंसी सेवा तक कैरियर के रूप में दलाल घूम रहे हैं। डॉक्टरों एवं चिकित्सकीय स्टॉफ के इर्द-गिर्द इन्हें अक्सर देखा जाता है। अस्पताल में नए मरीज के आते ही यह सक्रिय हो जाते हैं। पहले तीमारदारों के करीब पहुंचकर सेवा भाव का दिखावा करते हैं। विश्वास जमते ही अमुक निजी अस्पताल में चलने का सुझाव देते हैं।
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जिला महिला चिकित्सालय से प्रसूताओं को ले जाती हैं महिला कैरियर
जिला महिला चिकित्सालय में निजी अस्पतालों की ओर से महिला कैरियर मौजूद रहती हैं। प्रसूताओं के आने पर यह उनके साथ में लेबर रूम तक पहुंचती हैं। पहले तीमारदार तक सूचना का आदान-प्रदान करती हैं। इसके बाद अस्पताल की बदइंतजामी का हवाला देते हुए उन्हें मरीज को निजी अस्पताल में ले जाने के लिए तैयार करती हैं। सहमति मिलते ही तय निजी अस्पताल का नाम बता दिया जाता है। मदद के बहाने कैरियर संबंधित अस्पताल तक पहुंचाने के लिए भी आसानी से तैयार हो जाते हैं।
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जिला और कैली में पुरुष कैरियर की मौजूदगी
जिला अस्पताल और कैली अस्पताल में दो तरह के दलाल कैरियर के रूप में मौजूद रहते हैं। एक निजी अस्पताल के और दूसरे मेडिकल स्टोर के कैरियर होते हैं। इन अस्पतालों के ओपीडी में ज्यादा मेडिकल स्टोर के कैरियर मौजूद रहते हैं। यह मरीज को दिखाने तक का जिम्मा लेते। जैसे ही पर्चे पर बाहर की दवा लिखी जाती है, वह तीमारदार को साथ लेकर चहेते मेडिकल स्टोर पर पहुंच जाते हैं। इसके अलावा इमरजेंसी में निजी अस्पतालों के कैरियर मौजूद रहते हैं। यहां आने वाले दिल और दुर्घटना में घायल मरीजों के तीमारदारों को बरगलाकर निजी अस्पताल ले जाया जाता है।
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झांसे में आने का कारण ये भी...
सरकारी अस्पताल में मरीज की हालत बिगड़ने पर डॉक्टर इलाज करने से हाथ खड़े कर देते हैं। इमरजेंसी में प्राथमिक उपचार के साथ रेफर कागज तैयार कर दिया जाता है। अधिकांश मामलों में गंभीर रोगियों को भर्ती भी नहीं किया जाता है। इसी तरह जिला महिला चिकित्सालय में प्रसूताओं के आने पर पहले अल्ट्रासाउंड एवं ब्लड जांच की रिपोर्ट देखी जाती है। गर्भाशय में पानी की कमी, खून की कमी या हाई ब्लड प्रेशर होने पर मरीज को भर्ती न करके मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह दे दी जाती है। इस स्थिति का मरीज माफिया पूरा लाभ उठाते हैं। ऐसा ही नेटवर्क जिला चिकित्सालय एवं मेडिकल कॉलेज के ओपेक कैली में भी सक्रिय है।
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एंबुलेंस चालकों की भी रहती है भूमिका
सरकारी अस्पतालों के बाहर निजी एंबुलेंस चालकों की भी मरीजों को निजी अस्पतालों में पहुंचाने की अहम भूमिका रहती है। तीमारदार इन्हें गोरखपुर या लखनऊ के लिए बुक करते हैं तो वे मरीज को चहेते अस्पताल में ले जाने के लिए दिमागी कसरत शुरू कर देते हैं। यदि सफल हो गए तो बिना लंबी दूरी तय किए ही इनका भी काम बन जाता है।
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केस- एक
निजी अस्पताल में प्रसूता की हुई थी मौत
ओपेक चिकित्सालय कैली में एक प्रसूता साधना को गंभीरावस्था में रेफर किया गया। उन्हें दलालों ने जामडीह स्थित एक निजी अस्पताल में ले जाकर भर्ती करा दिया। 24 मई को प्रसूता की यहां मौत हो गई। तीमारदारों ने हंगामा किया। मामले में केस दर्ज हुआ। अस्पताल भी सील किया गया।
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केस- दो
सीएचसी गौर से प्रसूता जैनब खातून को 21 जुलाई की रात जिला महिला अस्पताल के लिए रेफर किया गया। रास्ते में एक आशा कर्मचारी और एंबुलेंस चालक ने परिजनों को बहला फुसलाकर निकट के ही एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। यहां महिला ने दो बच्चों को जन्म दिया। दोनों की मौत हो गई। बाद में प्रसूता की भी मौत हो गई।
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सरकारी अस्पतालों में दलालों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित है। इसके लिए ओपीडी और इमरजेंसी में कैमरे लगवाए गए हैं। सभी अस्पताल के अधीक्षक को इन पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। अनाधिकृत लोग यदि अस्पताल में दिखे तो उन्हें तत्काल पुलिस को सौंपे जाने को कहा गया है।
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-डॉ. आरपी मिश्र, सीएमओ
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