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अब हर हफ्ते होगी पाक्सो एक्ट की समीक्षा

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अब हर हफ्ते होगी पाक्सो की समीक्षा
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बस्ती। अब नौ वर्ष से कम बालिका के साथ हुए यौनाचार के मामलों में दर्ज पॉक्सो के मुकदमों में हर सप्ताह प्रगति की समीक्षा की जाएगी। ताकि जल्द से जल्द तफ्तीश पूरी कर फास्ट ट्रैक कोर्ट में आरोप पत्र भेजा जा सके। न्यायालय में और अधिक प्रभावी व मजबूत पैरवी करके सजा दिलाने की कोशिश करने के शासन ने निर्देश दिए हैं। होली के दरम्यान उन्नाव में नौ वर्ष की मासूम के साथ दुष्कर्म और गला दबाकर हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने नया फरमान जारी किया।
अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने इसी कड़ी में बुधवार को लोक भवन में उच्चस्तरीय बैठक में न्यायालयों में चल रहे पॉक्सो एक्ट के मुकदमों में पैरवी की कार्रवाई की विस्तार से समीक्षा की। जिसके बाद शासन स्तर पर भी पाक्सो एक्ट में हुई कार्रवाई तथा इससे जुड़े अभियोजन कार्यों की हर सप्ताह समीक्षा किए जाने का निर्देश दिया।
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कहा जा रहा है कि महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ बनाने के साथ उनके मुकदमों में प्रभावी पैरवी की जाएगी ताकि ऐसे अपराधियों को अधिकतम सजा दिलाई जा सके। पॉक्सो एक्ट के मुकदमों के जल्द निस्तारण के लिए नए कोर्ट के गठन में तेजी लाए जाने की कवायद भी शुरू की गई है। एसपी हेमराज मीणा का कहना है कि जिले में नौ वर्ष से कम उम्र के पांच मुकदमे दर्ज हुए हैं जिनकी विवेचना प्रचलित है। इनके तफ्तीश पर गहन निगरानी रखी जा रही है।
20 चार्जशीट दाखिल, 21 में सजा
प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल अफेंसेस (पॉक्सो) के तहत वर्ष 2019 में यहां कुल 20 मुकदमे दर्ज हुए। सभी में पुलिस ने तफ्तीश पूरी करके चार्जशीट न्यायालय को भेज दी है। वर्ष 2020 में अब तक पांच मुकदमे दर्ज किए गए, जिनमें पीड़िता की उम्र नौ वर्ष से कम है। इससे पहले 2019 में कुल 21 मुकदमों में 25 आरोपियों से अधिक को न्यायालय में सजा दी जा चुकी है।
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क्या है पाक्सो एक्ट
पॉक्सो यानी प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट 2012 यानी लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण का अधिनियम 2012 के तहत नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई की जाती है। यह एक्ट बच्चों को सेक्सुअल हैरेसमेंट, सेक्सुअल असॉल्ट और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है।
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