नई व्यवस्था के तहत किसानों को तत्काल मिलेगा 75 प्रतिशत का अनुदान
खेतों की गहरी जुताई करने के बाद डाला जाता है जिप्सम
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। रासायनिक खाद व कीटनाशकों के प्रयोग से जमीन की उर्वरक क्षमता लगातार गिर रही है। इसका असर पैदावार पर भी पड़ रहा है। कृषि विभाग मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए राजस्थान से 150 मीट्रिक टन जिप्सम मंगवाया है। राजकीय बीज भंडारों पर अनुदानित दामों पर किसानों में इसक वितरण शुरू कर दिया गया है।
बीते वर्ष तक सरकार की ओर से किसानों को 75 फीसदी अनुदान पर जिप्सम दिया जाता था। इसके लिए किसानों को पहले पूरा पैसा जमा करना होता था। मगर, इस वर्ष नई व्यवस्था के तहत अनुदानित दाम तत्काल किसानों को मिल जाएगा। अब उन्हें सिर्फ 25 प्रतिशत धनराशि ही देनी पड़ेगी। विभाग के अनुसार, 130 मीट्रिक टन जिप्सम पहुंच चुका है। इसे राजकीय बीज गोदामों पर भेज दिया गया है।
खेतों की उर्वरक क्षमता बढ़ाने के लिए जिप्सम का प्रयोग फसल की बुवाई से पहले करना चाहिए। खेत को जरूरत के अनुसार, गहरी जुताई कर तैयार करने के बाद ही उसमें जिप्सम डाला जाता है। खड़ी फसल में इसकी बुवाई नहीं करनी चाहिए।
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पोषक तत्वों का अनुपात बढ़ाता है जिप्सम
संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन में कैल्शियम व सल्फर मुख्य अपव्यय माने जाते हैं। इनमें जिप्सम एक महत्वपूर्ण स्रोत है। खनिज होने के बाद भी यह खेतों में उर्वरक के रूप में प्रयोग किया जाता है। जिप्सम में 29.4 प्रतिशत कैल्शियम और 23.5 प्रतिशत सल्फर होता है। यह आयन बनाता है। इससे मिट्टी की रासायनिक व भौतिक अवस्था में सुधार होता है।
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कोट
खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए राजस्थान से जिप्सम मंगाया गया है। किसान राजकीय बीज गोदामों से इसे प्राप्त कर सकते हैं। इन पर उन्हें 75 प्रतिशत तत्काल अनुदान दिया जा रहा है।
-रतन शंकर ओझा, जिला कृषि अधिकारी