बस्ती। धंधेबाज जीएसटी को भी बड़े पैमाने पर चूना लगा रहे हैं। बस्ती मंडल में अब तक इस तरह के तीन मामले सामने आ चुके हैं। आधा दर्जन फर्मों के जरिये जीएसटी में पांच करोड़ से अधिक का घपला हुआ है। ज्यादातर मामलों में कूटरचित आधार और पैन का इस्तेमाल कर फर्जी फर्म बनाकर जीएसटी नंबर लिया गया है। फर्जीवाड़ा पकड़ में आने के बाद शासन स्तर से जांच के निर्देश हुए हैं। इसके बाद डीआईजी संजीव त्यागी ने एसआईटी गठित कर मामले की छानबीन शुरू करा दी है।
एसआईटी जांच शुरू होने से राज्य एवं केंद्रीय कर विभाग (जीएसटी) में हड़कंप मचा हुआ हैं। जिम्मेदार अफसर कुछ बोलने से परहेज करने लगे हैं। खबर है कि प्रत्येक परिक्षेत्र से जुड़े अफसर भीतर ही भीतर जीएसटी से जुड़े अभिलेख दुरुस्त कराने में जुट गए हैं। कुछ फर्मों का दोबारा स्थलीय सत्यापन भी कराया जा रहा है। पिछले दो से तीन साल के जीएसटी की जांच शुरू हो गई है। इससे व्यापारियों को भी समस्या झेलनी पड़ रही है।
शासन के निर्देश पर डीआईजी ने मंडल स्तर पर एसआईटी गठित की है। इस टीम ने बस्ती और संतकबीरनगर से जुड़े जीएसटी घोटाला के मामलों की जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। इसमें राज्य कर विभाग के एक उपायुक्त भी फंस गए हैं। संतकबीरनगर खंड के तत्कालीन सहायक उपायुक्त अरविंद कुमार के खिलाफ खलीलाबाद कोतवाली में विभाग ने ही प्राथमिकी दर्ज कराई है। आरोप हैं कि उन्होंने बगैर तथ्यों की जांच किए और बिना सत्यापन के ही जीएसटी नंबर आवंटित कर दिया था। संबंधित फर्म ने भी जीएसटी में धोखाधड़ी की है।
जानकार बताते हैं कि अधिकतर केंद्रीय एवं राज्य कर विभाग के खंड में जीएसटी नंबर ऑनलाइन आवेदन के आधार पर जारी कर दिया जाता है। इसमें लगे आधार, पैन समेत अन्य प्रपत्रों का सत्यापन नहीं कराया जाता है। इसके अलावा फर्म का भौतिक सत्यापन भी नहीं किया जाता है। हाल ही में कोडीन युक्त कफ सिरप मामले में पकड़ में आई बोगस फर्म गणपति फार्मा का भी इसी तरह का मामला पकड़ में आया था। फर्जी पते के आधार और पैन पर इस फर्म के मालिक पंकज कुमार को केंद्रीय कर विभाग से जीएसटी नंबर जारी कर दिया गया था।
बाद में जब कोडीन युक्त कफ सिरप के सप्लाई का भांडा फूटा तो पुलिसिया छानबीन में पता चला कि संबंधित फर्म कूट रचित प्रपत्र पर पंजीकृत हुई है। इसके अलावा दूसरे के आधार, पैन का इस्तेमाल कर बोगस फर्मों का जीएसटी में पंजीकरण कराकर घालमेल किया जा रहा है। विभागीय अधिकारी इससे बेखबर रहते हैं।
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पंजीकरण के बदले विभाग को किया जाता हैं खुश
जीएसटी वेबसाइट पर जालसाज ऑनलाइन आवेदन कराते हैं। इसके जरिये केंद्रीय एवं राज्य कर के जिस खंड को मामला फारवर्ड होता है वहां जालसाज अपने नेटवर्क के जरिये संपर्क साध लेते हैं। बिना सत्यापन एवं प्रपत्रों की जांच के जीएसटी नंबर लेने के लिए माध्यम के जरिये विभाग को अच्छी खासी रकम पहुंचाई जाती है। इसीलिए आवेदन के आधार पर जीएसटी नंबर जनरेट कर दिया जाता है।
केस- एक
बस्ती में चार फर्मों के जरिये हुई धोखाधड़ी
जिले के वाल्टरगंज थाने में मुस्तफाबाद की रहने वाली गीता चौधरी ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। उनके अनुसार जीएसटी वेबसाइट पर किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा उनके आधार और पैन का इस्तेमाल चार अलग- अलग फर्म पंजीकृत कराया। इसमें राज्य कर बस्ती एवं केंद्रीय कर अयोध्या खंड से जीएसटी नंबर निर्गत हुआ है। इसपर करोड़ों का कारोबार कर जीएसटी हड़प ली गई। जब गीता चौधरी को विभाग से नाेटिस आई तो वह भी भौचक रह गई। बताया जा रहा है उनके पास कोई निजी फर्म नहीं है। वह सरकारी नौकरी में है। इसके बाद उन्होंने अज्ञात जालसाज के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराया।
केस- दो
प्रतापगढ़ की फर्म ने संतकबीरनगर में किया धोखाधड़ी
संतकबीरनगर जिले में तैनात तत्कालीन सहायक आयुक्त अरविंद कुमार ने खलीलाबाद कोतवाली में यादव इंटरप्राइजेज नसीरपुर हरयामऊ पट्टी प्रतापगढ़ के मालिक रंजीत सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज कराई है। आरोप हैं संबंधित फर्म के जरिये बड़े पैमाने पर जीएसटी घपला किया गया है। इसमें भी फर्म पंजीकरण में अवैध कागजात लगाए जाने की पुष्टि पुलिस की जांच में हो चुकी है। पता चला कि मामला सामने आने के बाद विभाग अपनी बचत में प्राथमिकी दर्ज कराया है। एसआईटी अब पूरे मामले की जांच में जुट गई है।
केस- तीन
सहायक आयुक्त खंड संतकबीरनगर पर दर्ज हुई प्राथमिकी
जीएसटी के लिए ऑनलाइन आवेदन के बाद सत्यापन करने में विभाग की लापरवाही भी सामने आ रही है। संतकबीरनगर के मौजूदा उपायुक्त राजेश कुमार पांडेय ने तत्कालीन उपायुक्त अरविंद कुमार के खिलाफ कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। आरोप हैं कि तत्कालीन उपायुक्त ने बगैर प्रपत्रों का सत्यापन और फर्म की स्थलीय जांच किए जीएसटी नंबर निर्गत कर दिए। जिससे जीएसटी का घपला हुआ। इसमें उनकी संलिप्तता विभाग ने पकड़ में आई है।
कोट
जीएसटी में घपला समेत तमाम बोगस फर्मों के पंजीकरण का मामला सामने आया है। इसे शासन ने भी संज्ञान में लिया है। पूरे प्रदेश में जीएसटी घोटाला पकड़ने के लिए एसआईटी गठित कर जांच कराने का निर्देश हुआ है। बस्ती मंडल में भी एसआईटी गठित कर ऐसे प्रकरणों की जांच शुरू कराई गई है।
-संजीव त्यागी, डीआईजी।