बस्ती। जिले में नवजात शिशुओं की मृत्यु दर घटाने के उद्देश्य से मेडिकल कॉलेज बस्ती के ओपेक चिकित्सालय कैली में राष्ट्रीय पुनर्जीवन कार्यक्रम (एनआरपी) का आयोजन किया गया। रविवार को हुई इस कार्यशाला में स्वास्थ्यकर्मियों को ''गोल्डन मिनट'' के महत्व और जीवन रक्षक उपायों के बारे में प्रशिक्षित किया गया। एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) की पीडियाट्रिशियन डॉ. अलका शुक्ला ने प्रशिक्षण दिया। सुरक्षित प्रसव के तौर-तरीके बताए गए।
डॉ. अलका ने बताया कि बच्चे के जन्म के बाद पहला एक मिनट ''गोल्डन मिनट'' कहलाता है और यह अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यदि इस दौरान नवजात सांस नहीं लेता है, तो उसकी मृत्यु हो सकती है या उसे मानसिक एवं शारीरिक विकलांगता जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने जोर दिया कि ''गोल्डन मिनट'' में नवजात को सही तरीके से सांस दिलाना और उसकी देखभाल करना जीवन बचाने में निर्णायक साबित होता है।
डॉ. मोहम्मद आमिर, डॉ. आफताब ने प्रशिक्षित किया। डॉ. अफरीन खान व डॉ. विवेक गौतम, डॉ. शादाब, डॉ. शुभम, डॉ. शरद ने जानकारियां दी। मातृत्व सुरक्षित सलाहकार राजकुमार ने बताया कि सीएचसी, पीएचसी, जिला अस्पताल व कैली में लेबर रूम, एनबीएसयू, एसएनसीयू में कार्यरत स्टाफ नर्स समेत 50 स्वास्थ्यकर्मी प्रशिक्षण में प्रतिभाग किए। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को इतना कुशल बनाना है कि नवजात के जन्म के तुरंत बाद यदि बच्चा रो नहीं रहा हो या उसे सांस लेने में कठिनाई हो, तो वे तत्काल आवश्यक कदम उठा सकें।
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नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में कमी आएगी
प्रशिक्षण के दौरान स्टाफ को यह भी बताया गया कि जन्म के बाद सबसे पहले यह जांचना आवश्यक है कि बच्चा प्री-मैच्योर है या मैच्योर। प्री-मैच्योर बच्चों में अक्सर अधिक जटिलताएं होती हैं और वे जन्म के बाद तुरंत रो नहीं पाते। ऐसी आपातकालीन स्थिति में, तत्काल रिससिटेशन प्रक्रिया अपनाकर बच्चे को सांस दिलाई जाती है।