फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Basti News: दलाल को दीजिए दो हजार... तब बनेगा लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस

Wed, 27 Sep 2023 12:50 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
विज्ञापन
विज्ञापन
- अब बदल गया पैटर्न, सिर्फ एक क्लिक पर छह सौ रुपये का चढ़ावा
विज्ञापन

- बाहर रकम वसूल रहे बिचौलिए, कोड के साथ अंदर पहुंच रही फाइल

बस्ती। यह गफलत न पालिए कि आप घर बैठे अपना लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस ऑनलाइन निर्गत करा लेंगे। विभाग या दलाल की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह सुनी-सुनाई बात है। विभाग के सारथी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन अपलोड करते ही आगे की प्रक्रिया रुक जाएगी। इसके बाद एक क्लिक विभाग करेगा, जिस पर ओटोपी आएगी है। तब प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। बिना चढ़ावा चढ़ाए यह क्लिक होगा भी नहीं। आप के बस का है भी नहीं। यह तो दलाल के माध्यम से ही संभव है। दलाल को दो हजार रुपये दे दीजिए तो आसानी से लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बन जाएगा।
लर्निंग (शिक्षार्थ) डीएल में विभाग की कोई भूमिका नहीं यह सिर्फ शोर मचाने वाली बात है। इसका पैटर्न बदलकर भले ही ऑनलाइन हो गया है, लेकिन बगैर दलाल के कुछ भी संभव नहीं है। हां, इतना जरूर है कि ऑनलाइन व्यवस्था होने से विभाग में आवेदकों की भीड़ न के बराबर हो गई है। अब यहां सिर्फ दलाल अपनी फाइलों को कोड के साथ भेज रहे हैं और कंप्यूटर से वेरीफिकेशन क्लिक कर दिया जा रहा है। इसके बाद ओटीपी आ रही है तब ऑनलाइन परीक्षा की प्रक्रिया शुरू हो रही है। यह भी दलाल ही पूरा करते हैं। बिना उनकी मदद के आवेदक ऑनलाइन परीक्षा नहीं दे पा रहे हैं। उसका आवेदन निरस्त हो जाता है। बाद में 50 रुपये फीस जमा कर दलाल की मदद से परीक्षा पूरी करनी पड़ रही है। तब ऑनलाइन लर्निंग डीएल बन पा रहा है।
विज्ञापन

लर्निंग डीएल की ऑनलाइन 350 रुपये फीस की जगह इस पूरी प्रक्रिया के लिए दलाल को दो हजार रुपये देने पड़ रहे हैं। इसमें 350 रुपये निर्धारित फीस जमा करने के अलावा वेरिफेकिशन क्लिक के लिए दलाल को विभाग में प्रति फाइल 600 रुपये चढ़ावा चढ़ाना पड़ रहा है। शेष रकम दलाल की जेब में जा रही है। प्रतिदिन शाम को कोड के अनुसार दलालों से हिसाब-किताब हो जा रहा है। इससे फंसने-फंसाने की कोई गुंजाइश भी नहीं है।

ऐसे करा रहे ऑनलाइन परीक्षा
सारथी पोर्टल पर आधार के जरिये आवेदन के बाद विभाग में वेरिफिकेशन क्लिक होता है। ओटीपी मिलने के बाद साफ्टवेयर फेस टू फेस ऑनलाइन परीक्षा होती है। इसमें बारी-बारी से 15 सवाल पूछे जाते हैं, जिसका तुरंत जवाब देना होता है। 9 प्रश्नों का उत्तर सही होने पर ऑनलाइन लर्निंग डीएल जारी हो जाता है। लेकिन, आवेदक इस प्रक्रिया को पूरा नहीं कर पाते हैं। दलाल उन्हें ऑनलाइन कैमरे के सामने बैठाते हैं और पीछे की-बोर्ड के साथ स्वयं बैठते हैं। वह मौन होकर सिर्फ प्रश्नों का उत्तर लिखते हैं। इस तरह साफ्टवेयर भी चकमा खा जा रहा है और लर्निंग डीएल जारी हो जा रहा है।

समय- 12 बजे
स्थान-आईटीआई परिसर में स्थित परिवहन विभाग का ड्राइविंग लाइसेंस प्रशिक्षण सेंटर
- यहां आरआई संजय कुमार अपने कक्ष में बैठे हैं। परमानेंट डीएल की फाइलों के साथ बाहर से लोग आ रहे है और वह हस्ताक्षर करते जा रहे हैं। वहीं, डीएल बनवाने एवं वाहन चलाने से संबंधित प्रशिक्षण के लिए बने दो क्लास रूम बंद मिले। बगल के एक कमरे में कंप्यूटर के साथ एक कर्मचारी मिला। उनके पास बाहर से कोड के साथ लर्निंग डीएल की फाइलें आती गईं। कंप्यूटर में क्लिक होते ही दलाल अपनी फाइलों को लेकर बाहर निकल जा रहे थे।

झाड़ियों से घिरा मिला ट्रायल ट्रैक
चार पहिया वाहन के ड्राइविंग लाइसेंस के लिए प्रशिक्षण कार्यालय के बगल बना ट्रायल ट्रैक झाड़ियों से घिरा मिला। यहां चारों तरफ झाड़-झंखाड़ देखने से ही लग रहा था कि काफी दिनों से यहां ट्रायल नहीं कराया गया है। कार्यालय में लाइसेंस निर्गत करने की प्रक्रिया चल रही थी मगर ट्रैक पर एक भी वाहन नहीं दिखा। पूरी तरह सन्नाटा रहा।

10 हजार में बन रहा भारी वाहन का डीएल
भारी वाहन का लाइसेंस बनाने के लिए दलाल आवेदकों से दस हजार रुपये ले रहे हैं। इसकी वास्तविक फीस एक हजार रुपये है। परिवहन विभाग मुख्यालय से जिले में सात मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल प्रशिक्षण के लिए अधिकृत है। मगर इनका स्कूल कार्यालय एवं परिसर कहां है, यह किसी को मालूम नहीं है। इनके पास ट्रायल ट्रैक एवं भारी वाहन भी नहीं है। बावजूद इसके, भारी वाहन के लाइसेंस के लिए दलाल अपनी सेटिंग के ट्रेनिंग स्कूल का प्रशिक्षण प्रमाणपत्र आवेदन के साथ लगा रहे हैं। इसके बदले दो हजार रुपये चढ़ावा चढ़ाना पड़ता है। फिर विभाग में भी इतना ही धनराशि चढ़ाकर लाइसेंस निर्गत करा दिया जा रहा है।

प्रतिदिन बन रहे डेढ़ सौ लर्निंग और 30 परमानेंट डीएल
- आरआई कार्यालय में प्रतिदिन औसतन 30 हल्के चार पहिया वाहनों के परमानेंट डीएल बनाए जा रहे हैं। जबकि आधा दर्जन भारी वाहनों के डीएल जारी हो रहे हैं। इसके अलावा ऑनलाइन लर्निंग लाइसेंस रोजाना औसतन डेढ़ सौ जारी किए जा रहे हैं।

केस- एक
मैं अपना लर्निंग डीएल बनवाने के लिए विभाग के प्रशिक्षण सेंटर पहुंचा। वहां कई लोगों से पूछा तो सभी का एक जवाब कि बाहर जाइए, वहां किसी कंप्यूटर वाले से समझ लीजिए। कार्यालय में कोई कुछ भी बताने को तैयार नहीं। बाहर आए तो एक दलाल ने दो हजार की डिमांड की। मैंने नहीं दिया। एक कंप्यूटर सेंटर पर 450 रुपये देकर ऑनलाइन आवेदन कराया। इसके बाद की प्रक्रिया बंद हो गई। बताया गया कार्यालय में जाइए वेरिफिकेशन कराइए तब ओटीपी आएगी। कार्यालय पहुंचने पर कोई मदद नहीं मिली। फिर दलाल की बात समझ में आई और उसे मुंह-मांगी रकम दे दी। अगले दिन बुलाया और ऑनलाइन परीक्षा दिलाई और लाइसेंस मिल गया। -शिवांशु त्रिपाठी, पुरानी बस्ती।

केस- दो
शासन का निर्देश है कि लर्निंग डीएल ऑनलाइन बनेगा। इसमें विभाग की कोई भूमिका नहीं है। मैं सारथी पोर्टल पर 350 रुपये जमा करके आवेदन किया। इसके बाद प्रक्रिया बंद हो गई। इधर-उधर पूछने पर पता चला कि वेरिफिकेशन कराने के लिए कार्यालय में जाना पड़ेगा। अपने आप कुछ भी नहीं होने वाला है। फिर दलाल की मदद ली। 1500 रुपये और देने पड़े। आज आरआई कार्यालय के बाहर हमें बुलाकर ऑनलाइन परीक्षा कराई गई। तब लाइसेंस निर्गत हुआ। -प्रभाकर सिंह, रुधौली
विज्ञापन

-
लर्निंग डीएल अब ऑनलाइन बन रहा है। विभाग की कोई भूमिका नहीं रहती। वेरिफिकेशन के लिए भी आने की जरूरत नहीं है। कार्यालय के संबंधित कंप्यूटर बाबू को तत्काल वेरिफाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए सुविधा शुल्क देने की बात निराधार है। वहीं, भारी वाहनों के डीएल विभाग मुख्यालय से पंजीकृत ट्रेनिंग स्कूल के प्रमाणपत्र पर ही निर्गत किया जा रहा है। -संजय कुमार, आरआई, परिवहन विभाग।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें