कुदरहा ब्लाक क्षेत्र के नौरहनी घाट पर कटान रोकने मे बना सहायक पीपक का गिरा पेड़।
घाघरा का जलस्तर मंगलवार को 93.010 पर स्थिर रहा। नदी अब भी खतरे के निशान 92.730 से 37 सेमी ऊपर बह रही है। जिससे विक्रमजोत घाघरा तटबंध के दक्षिण बसे गांवों कल्याणपुर, भरथापुर, सहजौरा पाठक व पड़ाव में कटान तेज हो गई है। जबकि कुदरहा क्षेत्र में करीब एक दर्जन गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। यहां नदी की धारा की चपेट में आया विशालकाय पीपल ने धारा को मोड़कर कटान और बंधे की सुरक्षा में मददगार सिद्ध हो रहा है।
केंद्रीय जल आयोग कार्यालय अयोध्या के मुताबिक यदि बारिश नहीं हुई तो जलस्तर घटेगा। विक्रमजोत के कल्याणपुर व भरथापुर में कई ग्रामीण अपने गृहस्थी के समान सुरक्षित करने के लिए दूसरे गांव में पहुंचा रहे हैं। क्योंकि इनके घर से 40 मीटर दूर कटान कर रही नदी कभी भी इन्हें आगोश में ले सकती है।
घाघरा पहले गौरियानैन के पास के हिस्से पर सर्वाधिक कटान कर रही थी मगर अब दो क्षेत्र में बट गया है। पहला नवनिर्मित लोलपुर विक्रमजोत बांध के पहले छोर के गांव केशवपुर, भदोई, मुण्डेरीपुर रानीपुर, कठवनिया, रामनगर जहां ठोकर नंबर एक का बड़ा हिस्सा रविवार सुबह बह गया था। आबादी 500 मी दूर है सिर्फ खेत धारा में समा रहे हैं। दूसरे छोर पर नदी से सटे सघन बसे चार गांव कल्याणपुर, भरथापुर, सहजौरा पाठक व पड़ाव में भीषण कटान चल रही है। डीएम एसपी सभी संबंधित अधिकारी मौके का स्थलीय निरिक्षण कर यहा के बदतर हालात देख चुके हैं। बंधे के अंतिम छोर के इन चार गांवों में बांध नहीं बना जिसके कारण ज्यों जलस्तर 93:00 मीटर छूता हैचारों ओर खेतों में बाढ़ का पानी भर जाता है। कल्याणपुर के ग्राम प्रधान संजय यादव का कहना है कि घाघरा 45वर्ष पुराने इतिहास को दोहरा रही है तब भी यह गांव कटान मे उजड़ गया था अबकी बार भी यही हो रहा है बचाव और राहत के नाम पर थोड़े से लेबरो के सहारे काम का दिखावा हो रहा है।