विक्रमजोत के कल्याणपुर मे हो रहा घाघरा का कटान।
घटती घाघरा की धारा से नुकसान बढ़ा है। रविवार को जलस्तर खतरे के निशान से 55 सेमी. नीचे 92.180 मीटर पर था। सोमवार को यह घटकर 92.020 मीटर के करीब पहुंच गया। बाढ़ कार्य खंड के अधिकारियों का मानना है कि जलस्तर घटने से कटान तेज हो रही है। फिलहाल बंधे सुरक्षित हैं।
कुदरहा प्रतिनिधि के मुताबिक करीब 10 दिन से घाघरा का दबाव पिपरपाती बंधे पर बढ़ गया था जिससे यहां बने स्परों में दो के पास नदी ने 10 मीटर तक बंधे की कटान की। डीएम और एसपी, एक्सईएन ने दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। बोल्डर, ब्रिक रोड़े से बांध को सुरक्षित करने का कार्य तेज हुआ। बंधे के कटान का खतरा टल गया। लेकिन ठोकर नंबर दो, चार और पांच पर घाघरा का दबाव बना हुआ है। नदी की धारा यहां आकर सीधे टकरा रही है। रविवार को एक बार फिर कटान शुरू हुई। पांच नंबर स्पर का बड़ा हिस्सा नदी में बह गया। बंधा कटते देख लोगों का हाथ पांव फूल गए। हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हो गई। कटे हिस्से पर बोल्डर एवं रोड़े डाल कर मरम्मत का कार्य तेज कर दिया गया।
विक्रमजोत प्रतिनिधि के मुताबिक लोलपुर- विक्रमजोत तटबंध के गांव कल्याणपुर, भरथापुर, सहजौरा पाठक में रुक-रुक कर कटान जारी है। अब गांव का प्राथमिक विद्यालय भवन भी नदी की जद में है। सोमवार को कटान सबसे ज्यादा सहजौरा पाठक और कल्याणपुर के पास रही। आसपास के लोगों का कहना है कि बाढ़ कार्य खंड के पास कोई ठोस योजना नहीं है। महज तीन पुराने ठोकरों की मरम्मत कर गांव को बचाने का दावा किया जा रहा है। गांव वाले बचाव व राहत कार्य में विभागीय लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। डीएम के वादे के अनुसार ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर बसाने का काम भी नहीं शुरू हुआ है।