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पांच साल में चार किमी पास पहुंची घाघरा

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बांध से सटकर बह रही है घाघरा। - फोटो : amar ujala
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 बस्ती/दुबौलिया। दिन में सबकुछ ठीकठाक दिखने वाला बालू खनन का कार्य रात भर चलता है। जेसीबी लगाकर अवैध खनन और बालू की ढुलाई हर कोई देखता है सिर्फ प्रशासन को छोड़कर। जिसकी देन है कि पांच साल में नदी गांवों की ओर चार किलोमीटर बढ़ी है। गांव के लोग हो-हल्ला भी करते हैं लेकिन थोड़ी सी इमदाद और धमकी से उनका मुंह बंद करा दिया जाता है।             
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 दुबौलिया के माझा क्षेत्र में रात के अंधेरे में खनन माफिया कई ट्रॉली बालू निकाल लेते हैं। मजदूरों के सहारे स्थानीय स्तर पर बिक्री करते ही हैं दूर-दराज गांवों में भी सस्ते पर पहुंचा देते हैं। दबंगई के चलते इनके खिलाफ कोई बोलने को तैयार नहीं होता। इसके कारण पहड़वापुर व खलवापुरा गांव नदी में विलीन हो गए। पारा गांव से दुबौलिया कस्बे के निकट अब घाघरा की धारा पहुंच रही है।
छावनी क्षेत्र में अवैध खनन पर हर साल खूब कड़ाई होती है लेकिन कुछ समय बाद माफिया, पुलिस और नेता में सामंजस्य बन जाता है। इसके बाद अवैध खनन बेलगाम शुरू होता है। मुड़ेरीपुर, छतौना बाघानाला, केशवपुर, चंद्रपलिया आदि गांवों के पास बांध को काट कर रास्ता बनाया गया है। अवैध खनन की हकीकत जाननी हो तो छावनी से विक्रमजोत, कलवारी से फुटहिया टू-लेन और फोर-लेन पर रात में निकलें। औकात से अधिक रफ्तार से बालू लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली भागते नजर आएंगे। इतना ही नहीं हादसा नहीं हुआ तो तेज रफ्तार के कारण उड़ रहा बालू आंखों तक जरूर पहुंच जाता है। हालांकि, कभी कभी पुलिस और प्रशासन खानापूरी करने के लिए इन ट्रॉलियों को सीज भी करता है जिसके बाद नजर बचाता है।             महादेवा विधानसभा क्षेत्र के विधायक रवि सोनकर ने महुआ खुर्द और महुआ कला के पास हो रहे अवैध खनन के लिए दो महीने पहले ही आवाज उठाई थी। शासनस्तर पर भी शिकायत की थी। इसके बाद थोड़ा नियंत्रण लगा। लेकिन गैर जनपद से बालू की आपूर्ति पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ा। विधायक रवि सोनकर का कहना है कि अवैैध खनन की शिकायत प्रशासन से शासन तक की गई जिसके बाद सक्रियता बढ़ी है। विधानसभा क्षेत्र में अवैध खनन नहीं होने देंगे यह तय मानिए।              
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इस संबंध में जिले के प्रभारी डीएम और सीडीओ अरविंद कुमार पांडेय का दावा है कि सूचना पर कार्रवाई होती है। बरदिया लोहार इसका उदाहरण बताते हैं। कहते हैं जहां कहीं भी अवैध खनन की सूचना मिलती है तत्काल कार्रवाई की जाती है। अवैध खनन पर नियंत्रण के लिए दो एसडीएम भी निगहबानी कर रहे हैं। 

कभी थी पक्की सड़क आज रेत ही रेत 
दुबौलिया। बालू खनन की ही देन है कि ब्लॉक क्षेत्र के ऐसे कई गांव नदी की धारा में आ गए जहां कभी पक्की सड़क और बिजली भी थी। ऐसे गांव केवटहिया, नई दुनिया, खलवा पासी पुरवा, खजंची पुरवा के कुछ घर जहां थे आज वहां रेत ही रेत बची है। गांव कटने के बाद बंधे पर रह रहीं दुर्गावती ने बताया बालू या मिट्टी खोदने से गांव पर नदी का दबाव बढ़ जाता है। खदान एक बड़ी समस्या बन गई है। शिवनारायन यादव ने बताया कि खनन के चलते नदी गांव के पास आ गई और गांव धारा में मिल गया। आज जो बंधे तक नदी आ गई है इसका कारण सिर्फ खदान है। राज कुमार ने बताया कि हमारी पूरी खेती नदी में चली गई। पहले गन्ना बाहुल्य क्षेत्र था लेकिन अब नदी बंधे से सटकर बह रही है।


तटबंध के गांव वालों की भी सुनिए                   
शंकरपुर ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि जगदंबा यादव का कहना है कि बालू का खनन यहां का ट्रेंड है। फोरलेन से लेकर गांव व कस्बे की सड़कों पर बालू लदे वाहनों के आवागमन से चलना दूभर हो जाता है। गर्मी और हवाओं से बालू उड़कर आंखों में पड़ते हैं। फिर भी विरोध करना कठिन है। कहते हैं कि सत्ता के संरक्षण में नए ठेकेदार निकल आते हैं।
कल्याणपुर निवासी केशवचंद्र पाण्डेय ने बताया कि घाघरा की कटान के चलते मेरे गांव का अस्तित्व खतरे में है। पिछले चार सालों में भारी पैमाने पर हुए बालू खनन से नदी का रुख गांव की ओर हो गया है। सात गांवों की आधी से अधिक जमीन नदी में समा चुकी है। जिम्मेदार अवैध खनन है। प्रशासन खनन माफिया के आगे बेदम साबित होता आया है।                  
छावनी निवासी भट्ठा मालिक बब्बू सिंह ने बताया कि क्षेत्र में बालू के ठेके नहीं होने से गोंडा और फैजाबाद से बालू मंगाना महंगा पड़ता है। जबकि बालू खदानों से यह सस्ते में मिल जाता है। जिसकी व्यवस्था ऑर्डर लेने वाला बालू एजेंट सांठ-गांठ से कर देता है। वैसे क्षेत्र में लगातार हो रहे बालू खनन से आसपास के गांवों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।
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