दुबौलिया। प्यास लगे तो कुआं खोदने वाली कहावत बाढ़ खंड पर सटीक बैठती है। क्योंकि कटरिया चांदपुर बंधे पर पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है और बाढ़ खंड उसे मिट्टी भरी बोरियों से बचाने में जुटा है। इसके चलते बंधे के आसपास के गांवों के लोग चिंतित हैं। गांव वालों का कहना है कि बगैर बोल्डर डाले नदी की धारा को रोक पाना मुश्किल है जबकि विभाग अभी बोल्डर की निविदा प्रक्रिया पूरी करा रहा है। यह अलग बात है कि बाढ़ खंड लगातार यह दावा कर रहा है कि वह हर हाल में बांध बचा लेगा।
कटरिया चांदपुर तटबंध पर 16 जून से बांध मरम्मत का काम शुरू हो गया था, लेकिन अभी तक सिर्फ बोरी में मिट्टी भर कर बेस बनाया जा रहा है। बाढ़ खंड के अधिकारी कहते हैं कि बाढ़ आने से पहले बंधे को मजबूत कर लिया जाएगा, लेकिन एक पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी मरम्मत कार्य में बोल्डर का प्रयोग न होने से ग्रामीण भयभीत हैं। बंधे से सटे करीब पौने दो लाख बोरी मिट्टी भर कर तटबंध के किनारे डाली जा चुकी है, लेकिन अभी बाढ़ से बचाव की स्थिति नहीं बन पाई है। तटबंध से सटे गांवों के लोगों को अब बाढ़ व बांध की चिंता सताने लगी है। क्योंकि मानसून शुरू हो गया है और अब तक बोल्डर नहीं गिर सका है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कई दिनों तक बारिश हुई तो मिट्टी का कार्य भी प्रभावित हो जाएगा। ग्रामीण राम पाल, चैतूराम, छोटे लाल, सुरेश, ग्राम प्रधान शोभा राम आदि का कहना है कि बगैर बोल्डर के इस तटबंध को नहीं बचाया जा सकता है। दो किलोमीटर के एरिया में नदी का दबाव तटबंध पर ही है, जो पानी बढ़ने पर बांध को क्षतिग्रस्त कर देगा।
बाढ़ खंड के एसडीओ जितेंद्र कुमार का कहना है तटबंध मरम्मत का कार्य तेजी से चल रहा है। बोल्डर के लिए टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। बाढ़ आने से पहले तटबंध को सुरक्षित कर लिया जाएगा ।