चार दिसंबर को हाइवे पर स्थित हर्रैया थाने के महुंघाट गांव के निकट सड़क के किनारे युवक का लहूलुहान शव पाया गया था। उसके जेब से मिले बटुए में आधार कार्ड व पैनकार्ड से उसकी पहचान रामनरेश निषाद (27) पुत्र जग्गी निषाद निवासी राम हाट बासुदेव घाट अयोध्या के रूप में हुई थी।
एक ही लड़की से दोनों की बातचीत पर हुआ विवाद : गिरफ्तार शत्रुध्न निषाद ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि तीन दिसंबर की शाम को पड़ोस के रामू निषाद से उसने बुआ के घर जाने के लिए बाइक मांगी थी, मगर बुआ के घर न जाकर वह रामनरेश को बाइक पर बैठाकर संतकबीरनगर के खलीलाबाद चला गया।
कहा कि एक लड़की से मिलने चलना है। वहां से तामेश्वरनाथ मंदिर पर पहुंचे और शत्रुध्न ने रामनरेश को वहीं रोककर पास के एक विद्यालय में चला गया। आधे घंटे बाद शत्रुध्न लौटकर आया तो उसने रामनरेश से लड़की का नाम बताया। नाम सुनते ही रामनरेश चौंक गया और कहने लगा कि उस लड़की से तो उसकी भी बातचीत होती है। इसे लेकर दोनों में विवाद हो गया और रामनरेश ने शत्रुध्न को चार-पांच थप्पड़ जड़ दिया। इसके बाद फिर दोनों बाइक से वापस अयोध्या जाने लगे। थप्पड़ मारने से झुंझलाए शत्रुध्न ने हर्रैया थाने के महुंघाट के पास बाइक में बंधा लोहे का रॉड निकालकर रामनरेश पर वार करके उसे मार डाला।
घर पहुंचने पर कपड़ों पर खून के छींटे देखकर शत्रुध्न के भाई शिवकुमार को शक हुआ। शत्रुध्न ने उसे हत्या की बात बता दी। पुलिस का कहना है कि शिवकुमार ने शत्रुध्न को बचाने के लिए उसके कपड़े जलवा दिए और अपने परिचित के यहां बाइक छिपा दी। पुलिस ने अपराधी को संरक्षण देने व साक्ष्य नष्ट करने का प्रयास करने के आरोप में सह अभियुक्त के तौर पर उसे गिरफ्तार कर लिया।
परिवारवालों ने जिन पर शक जताया वे निर्दोष निकले: रामनरेश के भाई ने जिन दो लोगों पर हत्या का नामजद मुकदमा दर्ज कराया था, उन पर शक करने की वजह अलग थी। असल में करीब छह महीने पहले रामनरेश एक लड़की लेकर भाग गया था। अयोध्या पुलिस ने कुछ ही दिन बाद लड़की को बरामद करके रामनरेश को गिरफ्तार कर लिया था। म
गर न्यायालय में लड़की ने रामनरेश के पक्ष में बयान दे दिया था, इसलिए वह जेल से छूट गया था। रामनरेश के परिवार वालों को शक था कि उसी लड़की के जीजा अरविंद निवासी मैनपुर थाना बीकापुर अयोध्या और गौरव निवासी राठ हवेली थाना कोतवाली अयोध्या ने मिलकर उसकी हत्या की है, परंतु दोनों निर्दोष निकले।