परिवार के शिवबचन व अन्य ने विरोध किया तो विपक्षियों ने जान से मारने की धमकी दी। बकौल शिवबचन, विभागीय सत्यापन कराने पर 1961-1962 के अभिलेखों में कोई बंटवारा दाखिल नहीं पाया गया। सत्यापन रिपोर्ट तत्कालीन चकबंदी अधिकारी विनोद सिंह को दी गई, लेकिन उन्होंने मानने से इन्कार कर दिया।
इसके चलते बेकारू व छोटका की जमीन उनके वारिसों को नहीं मिली। शिवबचन की तहरीर पर पुलिस ने तत्कालीन चकबंदी अधिकारी विनोद सिंह के अलावा धौरहरा गोचना निवासी सितई, चंद्रभान, अंकलेश, खदेरू, रामआसरे, रामशब्द, विनोद, फूलमती, सुनीता, हरेंद्र, वीरेंद्र, मैना, सरोजा, फुला, शकुंतला, शोभा, संकेश, रामू, श्यामू, लालू के खिलाफ केस दर्ज किया है।