पूर्व मंत्री राम प्रसाद चौधरी को एमपी-एमएलए कोर्ट ने शुक्रवार को दोषमुक्त कर दिया। न्यायाधीश अर्पित यादव की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि आरोपी राम प्रसाद को जनप्रतिनिधि अधिनियम के तहत लगे आरोपों से मुक्त किया जाता है।
मामला, 16 मार्च 2014 का है। तत्कालीन कोतवाली थाना प्रभारी विनय कुमार सिंह रौता चौकी पर मौजूद थे। आरोप है कि उन्हें मुखबिर से सूचना मिली कि लोकसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी राम प्रसाद चौधरी शहर के एक होटल के पीछे आवास पर गरीब लोगों को बुलाकर अपने पक्ष में मतदान करने के लिए धन का प्रयोग कर रहे हैं।
घटना की पुष्टि के लिए थाना प्रभारी वीडियो कैमरा लेकर उनके आवास पहुंचे। आरोप है कि वहां सूचना की पुष्टि हुई। मामले में कोतवाली पुलिस ने जन प्रतिनिधि अधिनियम व धारा 171 सीआरपी के तहत मुकदमा दर्ज किया।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता कृष्ण मोहन उपाध्याय ने दलील प्रस्तुत करते हुए आरोपों को निराधार साबित किया। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर पूर्व मंत्री को बरी कर दिया।