- सिद्धार्थनगर विश्वविद्यालय के निर्माण का अनुभव दिखाकर गोरखपुर, कानपुर और आगरा में हासिल किया टेंडर
- ईपीसी मिशन और राजकीय निर्माण निगम ने मांगा जवाब, ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी
बस्ती। सिद्धार्थनगर विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य के फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र के आधार पर गोरखपुर, कानपुर और आगरा में अरबों रुपये के काम का टेंडर हासिल करने का मामला सामने आया है। राजकीय निर्माण निगम की अयोध्या इकाई की जांच में कंपनी के प्रमाणपत्र फर्जी पाए हैं। फर्जीवाड़े की पुष्टि के बाद ईपीसी मिशन ने कंपनी को नोटिस जारी करके ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी दी है।
गोरखपुर में वानिकी एवं उद्यानिकी विश्वविद्यालय, कानपुर में लाला लाजपत राय चिकित्सालय परिसर में 200 बेड का एपेक्स ट्रामा सेंटर और आगरा में 150 बेड का लेडी लॉयल महिला चिकित्सालय के निर्माण के लिए निविदा आमंत्रित की गई थी। लखनऊ की जीएस एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड ने तीनों परियोजनाओं की बोली के साथ सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के निर्माण का अनुभव प्रमाणपत्र लगाया था। यूपी राजकीय निर्माण निगम अयोध्या से 21 अक्तूबर 2019 को जारी बताए गए प्रमाणपत्र में कंपनी ने निर्माण कार्यों और अनुभव का विवरण दिया है।
तीनों निविदाओं के मूल्यांकन में जीएस एक्सप्रेस सबसे कम बोली वाली कंपनी पाई गई। गोरखपुर की परियोजना के लिए तीन सितंबर को अनुबंध हो चुका है। आगरा की परियोजना के लिए कंपनी को लेटर ऑफ अवार्ड यानी काम कराने के लिए औपचारिक पत्र जारी कर दिया गया। इसी बीच कंपनी की ओर से दिए गए अभिलेखों का सत्यापन शुरू तो फर्जीवाड़ा सामने आ गया। नियोजन विभाग के अधीक्षण अभियंता राजेश कुमार की ओर से 12 अक्तूबर को कंपनी को नोटिस जारी किया गया है। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
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फर्जी सत्यापन पत्र और ई-मेल का भी आरोप
कंपनी को जारी नोटिस में कहा गया है कि सत्यापन में निर्माण निगम की अयोध्या इकाई और अंचल कार्यालय के नाम से 6 अप्रैल 2026 को जारी बताए गए पत्र आधिकारिक अभिलेखों में नहीं मिले। अयोध्या अंचल कार्यालय के पत्र का डिस्पैच रजिस्टर में भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। सत्यापन रिपोर्ट भेजने के लिए इस्तेमाल किए गए ई-मेल पते निगम के आधिकारिक ई-मेल से अलग पाए गए। निगम का कहना है कि डिजिटल फर्जीवाड़ा करते हुए अनुभव प्रमाणपत्र तैयार किया गया। फर्जी पत्रों व ई-मेल के जरिये उसका सत्यापन कराने की भी कोशिश की गई।
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अनुबंध निरस्त करने की चेतावनी
ईपीसी मिशन ने कंपनी को 14 दिन के भीतर जवाब देने को कहा है। साथ ही इस कृत्य से निविदा शर्तों और इंटीग्रिटी पैक्ट के प्रावधानों के तहत एलओए और अनुबंध निरस्त करने व कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने तक की चेतावनी दी है। पत्र में कहा गया है कि संबंधित प्रावधानों के तहत गलत जानकारी या जाली दस्तावेज प्रस्तुत करने की पुष्टि होने पर निविदा से अयोग्य घोषित करने, अनुबंध समाप्त करने और भविष्य की निविदाओं से बाहर करने जैसी कार्रवाई हो सकती है।
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राजकीय निर्माण निगम के नाम का फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र लगाकर सरकारी टेंडर हासिल करने की जानकारी मिली थी। इसका सत्यापन कराया गया तो आरोपों की पुष्टि हुई है। इस संबंध में जीएस एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस भेजा गया है। इसके बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
- आरके यादव, इकाई प्रभारी, राजकीय निर्माण निगम, अयोध्या
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उ.प्र. राजकीय निर्माण निगम से नोटिस प्राप्त हुआ है। नोटिस में कुछ आरोप लगाए गए हैं। कंपनी ने कोई फर्जीवाड़ा नहीं किया है। नोटिस में लगे सभी आरोपों का जल्द ही जवाब दे दिया जाएगा।
- संदीप आनंद, प्रबंध निदेशक, जीएस एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड, लखनऊ