कप्तानगंज। चार दिन कांबिंग करने के बाद वन विभाग की टीम निराश होकर मंगलवार को दोपहर में वापस लौट आई। वन विभाग की टीम के मुताबिक मनोरमा के जंगलों में तेंदुए जैसा जानवर का पद चिन्ह नही मिला और न ही नदी के तलहटी में कोई चिह्न मिला। जिससे तेंदुए को रेस्क्यू नही कर मिला।
वन दरोगा जगदीश प्रसाद, वन कर्मी रवींद्र सिंह, सुनील मिश्रा, रवि भारती सहित अन्य कर्मियों की टीम तेंदुए जैसा जानवर को रेस्क्यू करने के लिए ग्रामीणों के सहयोग से कांबिंग कर रही थी। चार दिन मनोरमा नदी के किनारे गांवों और जंगलों में खोजबीन के बाद निराश लौटना पड़ा। सूत्रों की माने तो मनोरमा नदी के किनारे बड़े जानवर का बसेरा है। ये जगह बदल बदलकर अपना शिकार करते है।
गोंडा जिले के टिकरी से होकर परसरामपुर मनोरमा नदी के किनारे जंगलों से होकर लालगंज तक अपना शिकार करते हैं। कभी कभी ये गांवों की तरफ भी अपना रुख करते हैं और शिकार की तलाश में जुट जाते है। रेंजर राजू प्रसाद ने बताया कि चार दिन कांबिंग करने के बाद कोई तेंदुए जैसा जानवर नहीं मिला है। जिससे आज से कांबिंग बंद कराया जा रहा हैं।