- राजस्व विभाग की तरफ से प्रस्तावित जमीन को वन विभाग ने किया खारिज
- नहर खंड ने भी जताया आपत्ति, मालिकाना हक के साथ नहीं दी जा सकती जमीन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहर के बाहर से होकर बनने वाले रिंग रोड के निर्माण पर वन विभाग की संरक्षित भूमि का पेंच फंस गया है। करीब 22 किमी लंबे रिंग रोड पर वन विभाग की 2.465 किमी संरक्षित भूमि पड़ रही है। इस जमीन की क्षति पूर्ति के लिए विभाग को इतनी ही भूमि देनी होगी। तहसील सदर ने इसके सापेक्ष जिस जमीन को विभाग को दिया था उसे वह खारिज कर चुका है। सरयू नहर के किनारे जमीन प्रस्तावित की गई तो विभागीय स्वामित्व का मुद्दा उठा गया। अब सदर तहसील के अधिकारियों का कहना है कि उनके पास मानक के अनुसार गैर वन क्षेत्र भूमि नहीं है। ऐसे में रिंग रोड निर्माण तब तक नहीं शुरू हो सकता है, जब तक संरक्षित वन भूमि के सापेक्ष जमीन नहीं मिल जाती। एसडीएम सदर को लिखे गए पत्र में प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी वन प्रभाग ने बताया है कि रिंग रोड के शून्य से लेकर 22वें किमी के बीच 2.465 हेक्टेयर संरक्षित वन भूमि आ रही है। निर्माण होने पर यह वन भूमि प्रभावित होगी। जिसके सापेक्ष गैर वन भूमि की आवश्यकता है। जब तक दूसरी भूमि नहीं मिल जाती तब तक निर्माण कार्य की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
वन विभाग की तरफ मांगी गई भूमि के सापेक्ष सदर तहसील प्रशासन ने शुभकर फिरोज पट्टी तप्पा कोरऊ परगना महुली पश्चिम के खाता संख्या 62 पर अंकित गाटा संख्या 155 क की 2.549 हेक्टेयर नई परती की भूमि को प्रस्तावित किया था। डीएफओ ने एसडीएम सदर को लिखे पत्र में कहा कि शुभकर फिरोज पट्टी की प्रस्तावित भूमि संरक्षित भूमि से काफी दूर है। ऐसे में जमीन अदला बदली का प्रस्ताव शासन में भेजने पर आपत्ति लग सकती है। डीएफओ नवीन शाक्य ने निर्माण एजेंसी के परियोजना निदेशक को भी पत्र भेजकर कहा कि वह अपने स्तर से पैरवी कर भूमि वन विभाग के नाम कराना सुनिश्चित करें।
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सरयू नहर की पटरी है प्रस्तावित जमीन
- एसडीएम सदर ने बस्ती रेंज में पड़ने वाली सरयू नहर के दोनों तरफ की जमीन को वन विभाग के नाम संरक्षित करने का प्रस्ताव दिया। प्रस्ताव के सापेक्ष सरयू नहर के सहायक अभियंता बलिकरन चौहान, राजस्व कर्मी संजय सिंह और धर्मेंद्र यादव व वन रक्षक की संयुक्त टीम ने सरयू नहर का निरीक्षण किया। अधिशासी अभियंता सरयू नहर खंड चार ने बताया कि यदि यह जमीन वन विभाग को दी जाती है तो भविष्य में मालिकाना हक उनका होगा।
यदि कहीं पर नहर कट जाती है या उसके पुर्ननिर्माण कार्य के लिए मिट्टी की जरूरत पड़ती है तो उसे यहां से नहीं लिया जा सकेगा। यह जमीन केवल पौधरोपण के लिए दी जा सकती है, मालिकाना हक के साथ नहीं दी जा सकती है। ऐसे में रिंग रोड प्रथम फेज के लिए कहीं और जमीन अधिग्रहीत कर वन विभाग के स्वामित्व देने की मांग की गई है।
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