दुबौलिया, विक्रमजोत और कुदरहा ब्लॉक के बाढ़ प्रभावित लोगों को इसी तरह खानाबदोश की जिंदगी गुजारने को मजबूर
- अपने पालकों की उजड़ी गृहस्थी निहार रहे बेजुबान, आधा पेट आहार
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सरयू ने माझा की दशा दयनीय कर दी है। बाढ़ से घिरे गांवों के लोग तटबंध पर आकर शरणार्थी बने हैं। मवेशियों संग इनकी पूरी रात तटबंध पर गुजर रही है। घर, मकान, बिस्तर, चूल्हा-चौकी सब गांव में ही छूट गया है। खुले आसमान के नीचे सूखी टहनियों की लौ पर किसी तरह खाना पक रहा है। चावल है तो दाल नहीं, रोटी है तो सब्जी नहीं, बस पेट भरने से मतलब है। बेजुबान भी अपने पालकों की उजड़ी गृहस्थी निहार कर आधे पेट आहार में ही संतोष कर रहे हैं।
सरयू के विकराल रूप के बाद दुबौलिया, विक्रमजोत और कुदरहा ब्लॉक के बाढ़ प्रभावित लोगों को इसी तरह खानाबदोश की जिंदगी गुजारनी पड़ रही है। दुबौलिया क्षेत्र के नदी और तटबंध के बीच स्थित सुबिका बाबू, टेढ़वा, विशुनदासपुर की अनुसूचित बस्ती, सरयू की दो धाराओं के बीच बसे कुर्मीयाना व देवारा गंगबरार का एक पुरवा सरयू की पानी से चौतरफा घिरा हुआ है। नदी में मंगलवार को विभिन्न बैराजों से 285974 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। शारदा बैराज से 149878, गिरिजा बैराज से 131478 व सरयू बैराज से 4618 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
कुदरहा क्षेत्र के मदरहवा में कटान के चलते गांव खाली होने के कगार पर पहुंच चुका है। लोग अपने गृहस्थी के सामान लेकर दूसरी जगह जाने लगे हैं। विक्रमजोत क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों में नदी का पानी घरों तक घुसा हुआ है। इससे कटान का खतरा है। बीमारी फैलने और विषैले जीव-जंतुओं का डर अलग से बना हुआ है।
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बंधे पर तिरपाल देखिए तो समझ जाइए बाढ़ पीड़ित
आजकल बंधे पर तिरपाल देखिए तो समझ जाइए यहां बाढ़ पीड़ितों का डेरा है। बाढ़ से घिरे गांव विशुनदासपुर अनुसूचित बस्ती के लोग मवेशियों के साथ तटबंध पर तिरपाल तान कर गुजर-बसर कर रहे हैं। यहां नजर दौड़ाने पर चारों तरफ पानी ही पानी दिख रहा है। दो धाराओं के बीच बसे कुर्मियाना वा देवारा गंगबरार के एक पुरवा के लोग भी खानाबदोश की जिंदगी जी रहे हैं। यहां के लोग नांव और ऊंचे टीलों पर समय काट रहे हैं। सुबिका बाबू गांव के लोग मोटर बोट से आ-जा रहे है। टेढवा गांव के ग्रामीणों के आवागमन के लिए मोटर बोट भी नहीं है। प्रधान के प्रतिनिधि श्रीराम सिंह ने एसडीएम से मांग की तो एक मोटर उपलब्ध कराया गया।
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बाढ़ पीड़ितों ने देखा घड़ियाल
सुबिका बाबू गांव के लोगों ने मंगलवार को गांव के पास घड़ियाल देखा है। हालांकि, बाद में वह नदी की गहराई की ओर बढ़ गया। उन्हें आशंका है कि कहीं रात के समय ऐसे जलीय जंतु आबादी क्षेत्र में न आ जाए।
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बाढ़ पीड़ितों में बांटी गई राहत सामाग्री
एसडीएम हर्रैया विनोद पांडेय ने बाढ़ पीड़ितों में राहत सामग्री वितरित की। विशुनदासपुर की अनुसूचित बस्ती में 45, सुविकाबाबू में 110 व टेढवा के 65 लोगों में राहत सामग्री का किट वितरित किया गया। इस मौके पर अजीत सिंह, रिशांक शुक्ला, अशोक पटेल, श्रीराम सिंह आदि मौजूद रहे।
एक दर्जन गांवों में घुसा बाढ़ का पानी
विक्रमजोत। क्षेत्र के एक दर्जन गांवों में घरों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। कल्यानपुर, भरथापुर, पड़ाव, संदलपुर, छतौना माझा, भौसिया मांझा, कन्हईपुर, खेमराजपुर, अर्जुनपुर, शम्भूपुर, लकड़ी दूबे, पकड़ी संग्रामपुर, बेतावा, दलपतपुर, मड़ना मांझा, मांझाकिता अव्वल आदि गांवों में बाढ़ का पानी भर जाने से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। इन गांवों के मुख्य मार्ग भी जलमग्न हैं। फसलें डूब गई हैं। पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है। एसडीएम हर्रैया विनोद कुमार पांडेय ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों में राजस्व कर्मी अलर्ट मोड में हैं। संवाद
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ठहरा हुआ है सरयू का जलस्तर
पिछले 24 घंटे से सरयू नदी का जलस्तर ठहरा हुआ है। केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के अनुसार, मंगलवार को भी सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान 92.730 से 59 सेमी ऊपर 93.320 मीटर पर रिकाॅर्ड किया गया। यह जलस्तर 24 घंटे से स्थिर बना हुआ है। नदी का रुख अभी समझ में नहीं आ रहा है।