बस्ती। सरयू नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से माझा क्षेत्र में बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। 20 से 25 गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। इनमें कई गांवों का बाहरी क्षेत्रों से संपर्क टूट गया है। पांच-छह गांवों के संपर्क मार्ग डूबने से आवागमन प्रभावित है। मैरुंड गांवों में हालात बिगड़ने से ग्रामीणों की दिनचर्या बदल गई है। रोजमर्रा की जरूरतों का सामान जुटाने और पशुओं के चारे के लिए लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के अनुसार मंगलवार शाम पांच बजे सरयू का जलस्तर 93.03 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान 92.73 मीटर से 30 सेंटीमीटर ऊपर है। जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में पानी तेजी से फैल रहा है। संपर्क मार्गों पर पानी भरने के कारण ग्रामीणों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। बाढ़ का असर स्कूली बच्चों की आवाजाही पर भी पड़ा है।
दुबौलिया संवाद के अनुसार तटबंध विहीन गांवों में बाढ़ का संकट बढ़ गया है। सुविका बाबू गांव पूरी तरह जलमग्न हो गया है, जबकि टेढ़वा गांव भी पानी से घिरने के कगार पर है। सुविका बाबू के ग्रामीण दैनिक जरूरतों के लिए मोटरबोट का सहारा ले रहे हैं। ग्रामीण राम स्वारथ ने बताया कि इस सीजन में तीसरी बार बाढ़ आई है। इससे बची हुई फसल भी खराब होने की आशंका है।
जगदीश पाल के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान कई वर्षों बाद बाढ़ आई है। इससे अगली फसल की बोआई भी प्रभावित हो सकती है। पशुओं के चारे की भी समस्या है। उधर, कटरिया-चांदपुर तटबंध पर खजांचीपुर से खलवा गांव तक करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में दबाव बढ़ा है। उमरिया रिंगबांध के पास भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है।
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आधा दर्जन गांवों के आसपास पहुंचा पानी, कटान का खतरा
विक्रमजोत। सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से 30 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचने से तटीय गांवों में चिंता बढ़ गई है। कन्हईपुर, खेमराजपुर, शंभूपुर, संग्रामपुर, बेतावा, लकड़ी दूबे, लकड़ी पांडेय, पकड़ी संग्राम और पकड़ी सूर्यवंश समेत कई गांवों के आसपास बाढ़ का पानी पहुंचने लगा है। खेतों में जलभराव से फसलों को नुकसान का खतरा है। बीडी तटबंध के दुधौरा के पास नदी तटबंध से सटकर बह रही है। बाढ़ खंड की टीम तटबंध की निगरानी और मरम्मत में जुटी है। ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर नदी खेतों को काट रही है। इससे कृषि भूमि के साथ आबादी पर भी खतरा बढ़ गया है।
घरों के करीब पहुंची नदी की धारा, ग्रामीणों में दहशत
कुदरहा। कलवारी-रामपुर तटबंध के दक्षिण बसे महुआपार कला, मईपुर, बैडारी मुस्तहकम, टेंगरिहा राजा और हरखौलिया उर्फ मटियरिया समेत कई गांवों में बाढ़ और कटान का खतरा बढ़ गया है। नदी की धारा आबादी के करीब पहुंचने से ग्रामीणों को घर और कृषि भूमि कटने की चिंता सताने लगी है। ग्रामीणों के अनुसार जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। बाढ़ के बीच खाद्य सामग्री और पेयजल की व्यवस्था में भी परेशानी होने लगी है। ग्रामीणों ने बचाव, राहत और स्वास्थ्य सुविधाओं के पर्याप्त इंतजाम किए जाने की मांग की है।
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तटबंध के कमजोर और संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी की जा रही है। एलबी तटबंध पर रेनकट, होल और गड्ढों को भरने का काम जारी है। कुदरहा और दुबौलिया क्षेत्रों में टीमें लगाकर काम कराया जा रहा है।
-दिनेश कुमार, एक्सईएन, बाढ़ खंड