बस्ती। सरयू नदी में जलस्तर बढ़ने की आशंका के बीच जिला प्रशासन ने बाढ़ से निपटने की तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं। जिले में 17 बाढ़ चौकियां, 38 शेल्टर होम, 20 नावें और पांच मोटरबोट तैयार रखी गई हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत व बचाव कार्य के लिए 100 आपदा मित्रों को प्रशिक्षित किया गया है।
इस बार एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के स्थान पर गोरखपुर पीएसी की बाढ़ प्रशिक्षित एक बटालियन राहत एवं बचाव कार्य का जिम्मा संभालेगी। फिलहाल सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन नदी में पानी का फैलाव शुरू हो गया है। इसे देखते हुए प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को अलर्ट कर दिया है। सदर और हर्रैया तहसील क्षेत्र में 17 बाढ़ चौकियां और 38 शेल्टर होम बनाए जा रहे हैं।
लोगों के सुरक्षित निकासी के लिए 20 बड़ी नावें और पांच मोटरबोट तैनात रहेंगी। जिले में सरयू समेत अन्य नदियों की बाढ़ से हर वर्ष व्यापक नुकसान होता है। बाढ़ के दौरान बड़ी संख्या में लोग एनएच-28 और राम-जानकी मार्ग के किनारे शरण लेते हैं। इसे देखते हुए सभी अधिकारियों की जिम्मेदारियां पहले ही तय कर दी गई हैं।
दुबौलिया, विक्रमजोत, कुदरहा और बहादुरपुर क्षेत्र में कटानरोधी कार्य कराए गए हैं। तटवर्ती गांवों की सुरक्षा के लिए 25 करोड़ रुपये की लागत से पांच से अधिक परियोजनाएं स्वीकृत हुई थीं, जिनमें अधिकांश पूरी हो चुकी हैं, जबकि कुछ पर कार्य जारी है। कटानरोधी कार्यों के चलते एनएच-28 फिलहाल सुरक्षित है। हालांकि जहां तटबंधों की मरम्मत अभी अधूरी है, वहां के ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है। सरयू का जलस्तर बढ़ने पर जिले के करीब 200 गांवों की लगभग दो लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित होती है।
पहली बार सेटेलाइट फोन और वायरलेस बाढ़ चौकी : इस बार जिला प्रशासन ने पहली बार सेटेलाइट फोन और वायरलेस बाढ़ चौकी की व्यवस्था की है। गोरखपुर पीएसी की एक बाढ़ प्रशिक्षित बटालियन जिले में तैनात रहेगी। 100 आपदा मित्रों को प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि 27 सदस्यीय टीम फिलहाल मुख्यालय पर मौजूद है।
मौसम की निगरानी के लिए जिले में 49 ऑटोमेटिक मौसम केंद्र सक्रिय हैं। इसके अलावा 20 स्थानीय गोताखोरों को भी तैनात किया गया है। आपदा विशेषज्ञ रंजीत रंजन लगातार बाढ़ प्रभावित गांवों में जागरूकता अभियान चला रहे हैं।
16 अस्थायी पशुशालाएं बनाई जाएंगी : बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए 38 शेल्टर होम तथा पशुओं के लिए 16 अस्थायी पशुशालाएं बनाई जाएंगी। राहत सामग्री और राशन किट की आपूर्ति के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। पशुओं के चारे के लिए भूसे की भी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने भी बाढ़ चौकियों पर दवाएं और जीवनरक्षक उपकरण उपलब्ध कराने की तैयारी पूरी कर ली है। सीएमओ डॉ. राजीव निगम ने बताया कि दवा किट तैयार हैं तथा दुबौलिया, विक्रमजोत, कुदरहा और बहादुरपुर सीएचसी को अलर्ट पर रखा गया है।
माझा खुर्द गांव के पास बने रेनकट : बहादुरपुर। सैफाबाद-कलवारी तटबंध के माझा खुर्द गांव के पास बने तीन रेनकट से कटान की आशंका, चूंकि बंधे पर पिच बनने के कारण लगातार आवागमन रहता है। तीन दिन पहले छोटे-छोटे तीन रेनकट बंधे पर गांव के लोगों ने देखा था, जो बारिश से लगातार बढ़ रहा है। दो रेन कट बांध पर पिच के बिल्कुल करीब हैं जबकि एक तटबंध के दक्षिण तरफ किनारे पर है।