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मत्स्य पालन भी है खेती का हिस्सा

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संवाद न्यूज एजेंसी
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मानिकचंद। राप्ती मत्स्य बीज उत्पादन केंद्र पड़ियाखास में विश्व मत्स्य दिवस पर गोष्ठी का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि डीएम आशुतोष निरंजन ने कहा कि से धान, गेहूँ, चना, मटर की तरह ही मछली पालन भी खेती का हिस्सा है। मछली पालन आर्थिक व स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत उपयोगी है।
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मछली आज मुख्य आहार में शामिल है। इसे खाने से प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, ओमैग-तीन मिलता है। मछली में पाया जाने वाला ओमेगा तीन कमजोर व कुपोषण की समस्या की समस्या में काफी कारगर माना जाता है। आय की दृष्टि से पड़िया हैंचरी को प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त हैं। गोष्ठी को कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरबी सिंह, मुख्य कार्यकारी अधिकारी संदीप कुमार वर्मा ने भी संबोधित किया। मौके पर पड़िया हैंचरी प्रभारी नरेंद्र प्रताप सिंह, अवर अभियंता नीरज श्रीवास्तव, दिलीप कुमार श्रीवास्तव, सतीशचंद्र त्रिपाठी, अवधेश कुमार वर्मा, विनय सिंह, रहमतुल्लाह, आशीष पाल, राहुल कुमार, राजकुमार आदि मौजूद रहे।
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