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एक पैर से जिंदगी की जंग में सर्वजीत

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एक पैर से जिंदगी की जंग लड़ रहे सर्वजीत
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- आटो रिक्शा चलाकर परिवार के सदस्यों का पाल रहे पेट
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
नगर बाजार। क्षेत्र के पालनगर निवासी 32 वर्षीय सर्वजीत अपने एक पैर के सहारे जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। इसी पैर के सहारे वे आटो रिक्शा चलाते हैं और उसी की आय से बुजुर्ग पिता व पत्नी का पेट पाल रहे हैं। उन्हें राजस्थान की एक संस्था ने कृत्रिम पैर का तोहफा दे दिया है। इससे काम में उन्हें आसानी हो रही है।
उक्त गांव निवासी सर्वजीत पढ़ाई पूरी करने के बाद लखनऊ स्थित निजी कंपनी में चालक बन गए। वर्ष 2012 में वह कंपनी के कार्य से वाहन लेकर दिल्ली जा रहे थे। रास्ते में दिल्ली बाईपास के निकट उनका वाहन अचानक खराब हो गया। वे वाहन से उतर कर खराबी दूर करने की कोशिश करने लगे। इसी बीच तेज रफ्तार लग्जरी वाहन की चपेट में आ गए। उन्हें कंपनी की ओर से लखनऊ स्थित ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने के लिए दाहिना पैर काट दिया। पैर कटने के बाद वे नौकरी छोड़ कर घर चले आए। यहां माता-पिता के साथ काम में हाथ बंटाते थे। कुछ दिन बाद मां का निधन हो गया और सर्वजीत अपने बुजुर्ग पिता व पत्नी के साथ घर पर रह गए। एकमात्र भाई उनका साथ छोड़ पत्नी सहित ससुराल में जा बसा। एक पैर के बगैर उन्हें जिंदगी में चारो ओर अंधेरा नजर आने लगा, मगर इस बीच उन्हें ऊपर वाले ने ताकत दी और वे आत्मविश्वास से जिंदगी की जंग लड़ने की मन में ठान ली।
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बैंक से लोन लिया और आटो रिक्शा चलाने का काम शुरू किया। इस बीच राजस्थान की एक कंपनी ने उन्हें कृत्रिम पैर भी लगा दिया। कृत्रिम पैर के बल पर सर्वजीत आटो रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं। दिव्यांग सर्वजीत की पत्नी अपने पति की कमाई से खुश हैं। वह कहती हैं कि पति दिव्यांग हैं तो क्या हुआ अपनी मेहनत की कमाई से परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। सर्वजीत ने बताया कि शुरू में तो ऑटो रिक्शा चलाने में परेशानी होती थी लेकिन अब ऑटो रिक्शा हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग हो गया है।
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