वर्तमान में कोई ऐसी व्यवस्था नहीं हैं, जिससे पता लगाया जा सके कि कौन सा भूखंड विवादित है और कौन सा नहीं। इससे आम लोगों को जहां परेशानी होती है, वहीं भूमाफिया इसके लाभ उठाते हैं।
भूमाफिया मौका देखकर विवादित जमीन पर कब्जा करके बाद में उसे बेच देते हैं। एक ही जमीन की कई बार रजिस्ट्री होने की आशंका बनी रहती थी। राजस्व परिषद ने अवैध कब्जे के स्थायी समाधान के लिए जिले के सभी राजस्व ग्रामों के भूखंडों को यूनिक कोड देने और वादग्रस्त जमीनों का राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली में दर्ज करने की योजना शुरू की है। इसके तहत जिले के पांच लाख 72 खाते के लगभग 10 लाख गाटों को यूनिक कोड नंबर देकर उसे ऑनलाइन किया जा रहा है।
भाजपा के संकल्प पत्र पर अफसरों ने काम करना शुरू कर दिया है। सत्ता में आने पर भाजपा ने जमीन पर से अवैध कब्जे को हटाने के साथ दोषियों को दंडित करने का वादा किया था। इसके तहत राजस्व परिषद ने सभी भूखंडों का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। ताकि किसी भूखंड के विवादित होने या न होने की जानकारी आसानी से मिल सके। इसके अलावा भविष्य में ऐसी चुनौती न आए, इसके लिए हर भूखंड को यूनिक कोड नंबर दिया जा रहा है। एडीएम संतोष राय ने बताया कि विवादित भूखंडों का विवरण संबंधित मूल पत्रावली का परीक्षण कर राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली से अनिवार्य रूप से दर्ज होगा। बताया कि इसकी ट्रेनिंग भी हो चुकी है, और 31 अप्रैल 2017 तक हर हाल में जिले के सभी गाटे को ऑनलाइन कर दिया जाएगा।
इसी व्यवस्था से होगी ऑनलाइन रजिस्ट्री
भूखंडों को ऑनलाइन करने की राजस्व परिषद की इस योजना को ऑनलाइन रजिस्ट्री शुरू होने से भी देखा जा रहा है। सभी गाटा ऑनलाइन हो जाने से रजिस्ट्री के फर्जीवाड़े को भी रोका जा सकता है। रजिस्ट्री विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि गाटों के यूनिक कोड नंबर मिल जाने से एक तरह से फर्जी रजिस्ट्री पर लगाम लग सकेगा। रजिस्ट्री विभाग में ऑनलाइन रजिस्ट्री की प्रक्रिया तेजी से चल रही है, कभी भी इसे अमली जामा पहनाया जा सकता है।