बस्ती। जिले में इस बार पंद्रह दिन पहले ही लक्ष्य से अधिक खाद बंट चुकी है। फिर भी तमाम किसान एक-एक बोरी खाद के लिए जूझ रहे हैं। समितियों पर हंगामा हो रहा है। प्रशासनिक अफसरों तक के फोन घनघना रहे हैं। पुलिस को भागदौड़ करनी पड़ रही है। किसान बिना खाद के लौट रहे हैं। जानकार बता रहे हैं वितरण व्यवस्था बेपटरी है। कहीं दो से तीन दिन के अंतराल पर खाद का वितरण हो रहा हैं तो कहीं ओवररेटिंग की जा रही रही है। किसान बताते हैं कि समितियों पर 267 रुपये की यूरिया 300 रुपये में मिल रही है। यदि कहीं आवाज उठ रही है तो जिम्मेदार यह कहकर बच रहे हैं कि जिन्हें खाद नहीं मिल रही वे झूठा आरोप लगा रहे हैं।
लोगों का कहना है कि खरीफ सीजन आते ही धंधेबाज सक्रिय हो गए। कृषि और सहकारिता दोनों महकमाें में इनकी गहरी पैठ कारगर साबित हुई। बताया जा रहा है कि वास्तविक किसान जब तक खाद लेने पहुंचते, निजी क्षेत्र और समितियों पर यूरिया का अकाल पड़ गया। गनीमत रही कि यूरिया की रैक नियमित रूप से पहुंच रही है। विभागीय आंकड़े बता रहे हैं कि इस बार जुलाई और अगस्त के लक्ष्य से 2703 एमटी ज्यादा यूरिया की खपत 15 दिन पहले ही हो चुकी है। 45849 एमटी लक्ष्य की जगह 48552 एमटी खाद का वितरण हो चुका है। जबकि पिछले साल इस सीजन में अगस्त के अंत तक 50189 एमटी खाद बांटी गई थी। यदि वितरण में निरंतरता बनी रही तो अभी बचे हुए 15 दिनों में यह आंकड़ा पार होने की संभावना है।
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पहले दुकानों से बंटी ज्यादा खाद अब समितियों की बारी
जून तक कृषि विभाग के अधीन 1200 दुकानों को खाद का आवंटन हुआ। निजी दुकानों ने 36110 एमटी यूरिया की खपत की है। समितियों के माध्यम से 12442 एमटी खाद का वितरण हुआ है। जुलाई में निदेशालय ने आवंटन परिवर्तन कर दिया। अब जिले को आवंटित खाद का तीन चौथाई यूरिया समितियों पर भेजी जा रही है। एक चौथाई ही दुकानों पर पहुंच रही है। वर्तमान में सहकारी समितियों में 17676 एमटी खाद उपलब्ध है।
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जरूरत से ज्यादा खाद लेने वाले 850 किसान चिह्नित
जांच में निजी दुकान और समितियों की पीओएस मशीन से ऐसे तमाम लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, जिन्हें कई बार में जरूरत से ज्यादा खाद दी गई है। इस तरह के 850 काश्तकार चिह्नित हुए हैं। इसमें कुछ ऐसे किसान हैं, जिनके नाम पर कम से कम 4 और अधिकतम 13 बार यूरिया आवंटित हुई है। कुछ लघु सीमांत किसानों के नाम 40 से 50 बोरी खाद निर्गत की गई है। जानकार बता रहे हैं कि शुरुआत में ही धंधेबाजों ने सेटिंग कर छद्म नामों से खाद की निकासी करा ली। वितरण में ज्यादातर घपला कप्तानगंज, हर्रैया, परशुरामपुर क्षेत्र में पकड़ा जा रहा है। पिछले दिनों यहां नकली लिक्विड यूरिया की दो फैक्टरियां भी पकड़ी जा चुकी हैं।
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ये दुकानें भी रडार पर
कप्तानगंज क्षेत्र में जनता खाद भंडार, समर्थ कृषि संस्थान, वर्मा खाद भंडार, एग्री जंक्शन-कुदरहा, दल सिंगार खाद भंडार भानपुर समेत एक दर्जन दुकानों से एक ही किसान को कई बार मानक से अधिक खाद दी गई है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. बाबूराम मौर्य के अनुसार अभी और दुकानों और समितियों पर वितरण संदिग्ध लग रहा है। इसका खुलासा जल्द किया जाएगा। जांच के दौरान मानक से अधिक खाद बेचने वाली अधिकतर दुकानें बंद मिल रही हैं।
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समिति एवं निजी दुकानों से कई-कई बार खाद लेने वाले किसान भी चिह्नित किए जा रहे हैं। उनकी भूमिका संदिग्ध लग रही है। इसकी जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने पर सभी के खिलाफ कार्रवाई होगी। डॉ. बाबू राम मौर्य, जिला कृषि अधिकारी
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किसी भी समिति पर खाद की ओवररेटिंग नहीं हो रही है। सभी सचिवों को निर्धारित मूल्य 267 रुपये प्रति बोरी यूरिया बेचने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कहीं ओवररेटिंग हो रही है तो किसान उनसे सीधे शिकायत कर सकता है। तत्काल कार्रवाई होगी। -आशीष श्रीवास्तव, एआर कोऑपरेटिव
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फिर पहुंची यूरिया की खेप
बस्ती। जिले में यूरिया की नई खेप फिर पहुंच गई है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. बाबूराम मौर्य ने बताया कि एनएफएल से 2645 एमटी यूरिया की रैक मिली है। इसमें 1944 एमटी खाद समितियों पर भेजी जा रही है। जबकि 701 एमटी खाद निजी क्षेत्र की दुकानों पर भेजी जा रही है। दो दिन में इस खाद का भी वितरण शुरू हो जाएगा। किसानों को खाद की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने आह्वान किया कि किसान जरूरत के हिसाब से ही खाद लें। अधिक लेने पर कार्रवाई भी हो सकती है। बताया कि एक एकड़ फसल में दो बोरी यूरिया का छिड़काव पर्याप्त है। संवाद