भानपुर। गर्मी के मौसम में हरे चारे के रूप में पशुओं को सूखे खेत की चरी खिलाना हानिकारक हो सकता है। इसको लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
यह बातें डिप्टी सीवीओ डॉ. बलराम चौरसिया ने मंगलवार को असनहरा में आयोजित गोष्ठी में कही। उन्होंने कहा कि मई और जून माह में अधिक गर्मी और पानी की कमी के कारण कई बार खेत में बोई हुई ज्वार या चरी झुलस जाती है। पानी की कमी से झुलसी हुई चरी में मौजूद ग्लूकोसाइड नामक लाभकारी पोषक तत्व हाइड्रोसायनिक अम्ल (साइनाइड) नामक जहरीले पदार्थ में बदल जाता है। जिससे चरी जहरीली हो जाती है। विषाक्त चरी खिलाने से पशुओं में बेचैनी होने लगती है। मुंह से झाग निकलने लगता है और शरीर में कंपकपी होने लगती है। ऐसे पशुओं को यदि समय से उपचार न मिले तो संबंधित पशु की जान काे खतरा हो सकता है।