पिता-पुत्र को चार साल की सजा
बस्ती। विशेष सत्र न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट अब्दुल कयूम की अदालत ने मारपीट के मामले में पिता-पुत्र को चार वर्ष की सजा व चार-चार हजार रुपये का अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर पंद्रह दिन की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
विशेष लोक अभियोजक हयात मोहम्मद ने अदालत को बताया कि लालगंज थानाक्षेत्र के दसकोलवा निवासी चंद्रशेखर ने थाने में तहरीर देकर कहा कि 1993 में हबीज नामक व्यक्ति से रिजर्व पुलिस लाइंस बस्ती में एक विस्वा जमीन खरीदा था। जमीन को फ्री होल्ड कराने का आवेदन किया था। 29 अक्तूबर-1999 को जमीन पर कब्जा करने सिविल लाइंस निवासी रामफेर भारती, दीपक व फूलमती ने उसके भाई विनोद को जाति सूचक गाली देते हुए मारापीटा। दौरान मुकदमा फूलमती की मृत्यु हो गई। न्यायालय ने रामफेर व दीपक का दोषी मानते हुए सजा सुनाई। दूसरे पक्ष के रामफेेर भारती ने मारपीट के आरोप में चंद्रशेखर, विनोद व अरुण कुमार के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में तीनों को बरी कर दिया।