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Basti News: पूर्वांचल में फैला जाली नोट का नेटवर्क...पुलिस की रडार पर कई और जालसाज

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बस्ती। पुलिस बस्ती समेत पूर्वांचल के कई जिलों में सक्रिय जाली नोट के नेटवर्क के करीब पहुंच चुकी है। अभी कई और जालसाज पुलिस के रडार पर है। संदिग्धों को पकड़ने के लिए पुलिस तेजी से हाथ- पैर चला रही है। एक दिन पहले पकड़े गए गिरोह के सरगना और उसके साथियों ने जाली नोट खपाने के इस खेल से संबंधित कई अहम सुराग दिए हैं। जिस पर पुलिस नए सिरे से काम करना शुरू कर दी है। इसमें सर्विलांस सेल की भी मदद ली जा रही है।
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बस्ती, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, अयोध्या, संतकबीरनगर, आंबेडकर नगर समेत पूर्वांचल के कई जनपदों में जाली नोट खपाने का धंधा एक दशक से चल रहा है। पुलिस के अनुसार ज्यादातर धंधेबाज धोखाधड़ी करके ही जाली नोट आम लोगों के बीच खपा रहे हैं। क्योंकि इनके जाली नोट जागरूक व्यक्ति के हाथ लगते ही तत्काल पकड़ में आ सकता है। इसीलिए इस गिरोह के सदस्य शहरी क्षेत्र या बड़े व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को निशाना नहीं बनाते हैं।
अमूमन ग्रामीण क्षेत्र में ही इनका यह खेल ज्यादा सफल हो रहा है। इस तरह के गिरोह की धरपकड़ पहले भी हो चुकी हैं। हर बार पुलिस की जानकारी में यहीं आया है कि यह लोग नकली नोट की गड्डियों के ऊपर व नीचे असली नोट लगा कर रखते हैं। ग्रामीण क्षेत्र के बैंकों के आसपास गिरोह में शामिल लोग पहले रेकी करते हैं। इस बीच बैंक से रुपये निकालकर लौटने वाले सीधे-सादे लोगों पर नजर रखते हैं।
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मौका देखकर उन्हें दोगुना या तीन गुना रुपये का लालच देकर झांसे में लेते हैं। इसके बाद अपनी गड्डी के नकली नोटों को असली नोटों से बदल लेते हैं। बाद में संबंधित व्यक्ति को जब गड्डियों में नकली नोट होने का पता चलता हैं तब वह हतप्रभ रह जाता है। यह गिरोह एक क्षेत्र में कई दिनों तक कोशिश करता हैं। सफलता नहीं मिलने पर ही दूसरे कस्बों में पहुंचता है।
एक दिन पहले शनिवार को ऐसे ही एक गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इसमें नेपाली नागरिक समेत पांच लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इनके पास से चार लाख 20 हजार रुपये जाली नोटों की गड्डियां और तीन मोटरसाइकिल भी बरामद हुई हैं। इन अंतरजनपदीय गिरोह में दो बलरामपुर, एक संतकबीरनगर और एक सदस्य महराजगंज जिले का शामिल हैं। पुलिस की पूछताछ में इन लोगों ने कई अन्य संदिग्धों का भी नाम उगला है।
पुलिस उनकी कुंडली खंगालने में जुट गई है। बताया जा रहा है कि इस गिरोह का नेटवर्क पूर्वांचल के कई जनपदों में फैला हैं। गिरोह से जुड़े सदस्य नकली नोटों की गड्डियों को असली नोट में छिपाकर किसी न किसी को ठगते रहते हैं। बस्ती पुलिस आसपास के जिलों की पुलिस से समन्वय बनाकर इस नेटवर्क के पीछे लग गई हैं।

सितंबर 2025 में 15 लाख रुपये जाली नोट के साथ हुए थे चार गिरफ्तार
पुलिस ने सात महीने पहले भी सितंबर 2025 में जाली नोट के गिरोह का भंडाफोड़ किया था। उस समय चार जाली नोट खपाने वाले गिरोह के चार गुर्गे पकड़ में आए थे। जिनके पास से 15 लाख रुपये के जाली नोट (पांच-पांच सौ रुपये की 30 गड्डियां), 10 मोबाइल फोन और कार भी जब्त की गई थी। गुर्गों में दो संतकबीरनगर, एक बस्ती और एक गोंडा जिले का रहने वाला था। यह गिरोह विक्रमजोत मछली मंडी के पास से पकड़ में आया था। इनके कार की तलाशी में कई फर्जी नंबर प्लेट भी मिले थे। पता चला कि अपनी पहचान छिपाने के नाते यह लोग भिन्न-भिन्न जगह पर यह गाड़ी का नंबर प्लेट बदल देते हैं।
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फरवरी 2020 में नोट छापने की मशीन के साथ पकड़े गए थे जालसाल
छह साल पहले फरवरी 2020 में पुलिस ने कलवारी थाने के एक्सड़ा पुल के पास से नकली नोट छापने व प्रसारित करने वाले पांच सदस्यीय गिरोह को दबोचा था। इनके पास से दो-दो सौ की हूबहू नई करेंसी जैसी एक लाख 81 हजार रुपये जाली नोट की गड्डी बरामद हुई थी। गिरोह में शामिल सदस्य अभय के कलवारी थाना के केंवचा गांव स्थित घर से नोट छापने के उपकरण व कागज बरामद किए गए थे। काफी मात्रा में अर्द्धनिर्मित नोट, नोट की साइज में कटे हुए कागज, पांच मोबाइल फोन आदि भी पुलिस को मिले थे। इस गिरोह के सरगना गणेश मौर्य ने पुलिस को पूछताछ में बताया था कि यहां से नोट छापकर आंबेडकर नगर, आजमगढ़ समेत कई जिलों के खुदरा बाजार में सप्लाई करते थे।
कोट
जाली नोट के गिरोह को पुलिस ने पकड़कर जेल भिजवाने तक की प्रक्रिया पूरी कर दी है। अभी कई और संदिग्धों के नाम सामने आए हैं। मामले में अभी जांच पड़ताल की जा रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा हैं कि जाली नोट कहां निर्मित की जाती थी और कैरियर के रूप में इसमें कितने अन्य लोग काम करते थे। इस पूरे नेटवर्क के खात्मे के लिए पुलिस शिद्दत से जुट गई है।
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-श्यामकांत, एएसपी।
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