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बाढ़ पीड़ितों ने किया अधिशासी अभियंता का घेराव

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दुबौलिया बाढ़ चौकी पर अधिकारियों का घेराव करते ग्रामीण। - फोटो : BASTI
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बाढ़ पीड़ितों ने किया अधिशासी अभियंता का घेराव
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दुबौलिया (बस्ती)। सरयू नदी का जलस्तर घट चुका है। बाढ़ की विभीषिका झेल रहे ग्रामीण भीषण कटान के चलते दहशत में हैं। केंद्रीय जल आयोग अयोध्या ने बताया कि शुक्रवार को जलस्तर खतरे के निशान 92.73 मीटर से करीब 97 सेंटीमीटर नीचे 91.76 मीटर दर्ज किया गया। नदी की धारा कटान करती हुई जिले के अतिसंवेदनशील कटरिया-चांदपुर तटबंध किनारे पहुंची गई है। खलवा, खजांचीपुर एवं विशुनदासपुर पुरवा के पास तेजी से कटान हो रही है। कटान से दहशत में आए ग्रामीणों ने शुक्रवार को खलवा के पास तटबंध पर प्रदर्शन किया।
अधिशासी अभियंता दिनेश कुमार व सहायक अभियंता जितेंद्र कुमार का घेराव करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि कटान रोकने के लिए बोरियों में मिट्टी भरकर लगाया जा रहा है, जो कटान रोकने में नाकाफी साबित हो रहा है। नदी तटबंध से कुछ ही दूर है। तटबंध पर कटान रोकने के लिए चल रहा काम ग्रामीणों ने बंद करा दिया। सूचना पर पहुंचे तहसीलदार चंद्रभूषण प्रताप व प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार ने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर मामले को शांत कराया, तब जाकर दोबारा काम शुरू हो सका।
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खलवा-खजांचीपुर के पास कटान के कारण स्थिति अतिसंवेदनशील हो गई है। बाढ़ खंड बोल्डर की जगह परकोपाइन और मिट्टी की भरी बोरियां डालकर कटान को रोकने की कोशिश कर रहा है। खजांचीपुर के पास बचाव कार्य शुरू नहीं किया गया। गौरा-सैफाबाद तटबंध पर दिलाशपुर व टकटकवा के करीब नदी कटान करती हुई तटबंध की ओर बढ़ रही है।
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विक्रमजोत प्रतिनिधि के अनुसार नदी की मुख्यधारा मुंडेरीपुर स्थित लोलपुर-विक्रमजोत तटबंध पर सीधे टकरा रही है। इससे दो स्परो के नोज क्षतिग्रस्त हो गए हैं। बाढ़ खंड इनकी मरम्मत करा रहा है। बाघानाला स्थित अंत्योष्टि स्थल का एक तिहाई भाग कटकर बह गया। शेष हिस्से को बचाने के लिए बृहस्पतिवा से अवर अभियंता जेबीएल श्रीवास्तव की मौजूदगी में काम कराया जा रहा है। कल्याणपुर और भरथापुर के पास बने डैंपनर के चलते सील्ट जमा कर हो गई है। गौरियानैन व रानीपुर कठवनियां में निर्माणाधीन डैंपनर पर भी सिल्ट जमा हो गई है। सहायक अभियंता दयाशंकर सिंह ने बताया कि सिल्ट व गाद से निर्माण स्थल दलदले हो गए हैं। सूखने पर ही निर्माण कार्य दोबारा शुरू हो पाएगा। बताया कि कटान का खतरा धीरे-धीरे कम हो रहा है।
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