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Basti News: उत्पाती बंदरों के निजात दिलाने का ईओ-प्रधान को जिम्मा, दोनों बेफिक्र

Tue, 22 Oct 2024 04:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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आवास विकास मोहल्ले में गेट के अंदर दा​खिल होकर उत्पात मचाते बंदर
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शासन ने ईओ व प्रधानों को 22 माह पहले सौंप रखी है बंदरों के उत्पात से निजात दिलाने की जिम्मेदारी
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आईजीआरएस पर शिकायतों की अधिकता को लेकर शासन ने जारी कर रखा है निर्देश
डीएफओ बोले-ग्राम पंचायतों व निकायों के संज्ञान में लाया जा रहा शासन का निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहर से लेकर गांवों तक बंदरों के उत्पात से लोग परेशान हैं। किसी न किसी क्षेत्र में कुछ खूंखार बंदर हमले कर लोगों को घायल कर रहे हैं। इनसे निजात दिलाने का जिसे जिम्मा सौंपा गया है उन्हें इसकी चिंता ही नहीं है। 22 माह पहले अधिशासी अधिकारी नगर पालिका व नगर पंचायत के साथ ही ग्राम प्रधान को शासन स्तर से इनसे निजात दिलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
पीड़ित लोगों के आईजीआरएस पर शिकायत के बाद 9 जनवरी 2023 को यह व्यवस्था लागू की गई थी। बावजूद इसके शहरी क्षेत्रों में न तो ईओ कोई पहल कर रहे हैं और न तो गांवों में प्रधान दिलचस्पी ले रहे हैं। डीएफओ जेपी सिंह ने बताया कि मुख्यालय के निर्देशानुसार शिकायतकर्ताओं को अपने ग्राम पंचायतों व नगर निकायों में आवेदन करने के लिए सूचित किया जा रहा है।
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दूसरी तरफ वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक दीपक कुमार ने अपने सभी जिम्मेदार अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह शिकायतकर्ताओं को अब अपने संबंधित ग्राम पंचायतों व नगर निकायों को बंदरों को पकड़वाने के लिए शिकायत करें। ताकि वह प्रशिक्षित लोगों की मदद से बंदरों को पकड़ कर जंगल में छोड़ने का कार्य कर सकें।
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जिले में तीन हजार बंदर मार रहे गुलाटी

वन्य पशु गणना 2022 के अनुसार, जिले में कुल 3097 बंदर मौजूद हैं। इनमें 1337 नर, 919 मादा व बाकी बच्चे हैं। कप्तानगंज रेंज में 613, हर्रैया में 439 व रामनगर में 477 बंदर हैं। बस्ती सदर रेंज में 1446 बंदरों ने धमाचौकड़ी मचा रखी है। यह आंकड़ा उस समय का है जब अयोध्या में श्रीराम लला के प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा नहीं हुई थी। जबकि प्राण प्रतिष्ठा के पूर्व व बाद में पूरी अयोध्या में विशाल समूहों में मौजूद बंदरों को आसपास के जिलों के वन क्षेत्रों में लाकर छोड़ दिया गया था। उम्मीद जताई जा रही है कि अब जिले में इनकी संख्या कई गुना ज्यादा बढ़ गई होगी।
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उत्साही युवाओं ने अब तक चलाया अभियान

वन विभाग के पास पिंजरा व अन्य संसाधन हैं। मगर, बंदरों व खतरनाक जानवरों को पकड़ने के लिए कोई विभागीय प्रशिक्षित टीम नहीं है और न ही कोई बजट है। दो साल पहले जेल व जिला प्रशासन की पहल पर बंदरों को पकड़ने का अभियान चलाया गया तो फॉरेस्ट रेंजर राजकुमार ने बस्ती व सिद्धार्थनगर के कुछ उत्साही युवाओं के सहारे डीएम-एसपी व कमिश्नर आवास से लेकर जेल व रेलवे स्टेशन तक करीब सात सौ बंदरों को पकड़ कर फरेंदा के जंगल में छोड़ा था। इस बीच बंदरों के कुनबे बढ़ते चले गए। इन उत्साही युवाओं के लिए दैनिक मजदूरी का भी कोई इंतजाम वन विभाग नहीं कर सका। इससे अभियान ठप पड़ गया। दूसरी तरफ खतरनाक जानवरों को भी पकड़ने का कोई इंतजाम नहीं है। जिसकी आवश्यकता तब से और अधिक महसूस की जा रही है जब 12 मई 2018 को हरैया के फरदापुर के एक घर में 12 घंटे तक एक तेंदुआ घुसा पड़ा रहा। वन विभाग को इसे कब्जे में लेने के लिए लखनऊ व सोहगीबरवा की टीम का सहारा लेकर पिंजड़े में कैद करना पड़ा था।
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