राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर में करीब सात साल से इंजीनियरिंग कॉलेज का निर्माण हो रहा है। इस सत्र में इसके संचालन की उम्मीद थी, मगर इसके पूरा होने के लिए करीब छह करोड़ रुपये की जरूरत अब तक शासन स्तर से पूरी नहीं हो सकी है। नतीजतन अभी जिले को इंजीनियरिंग कॉलेज लिए इंतजार करना होगा।
वर्ष 2016 से निर्माणाधीन इंजीनियरिंग कॉलेज धन न मिलने से अभी तक अधूरा पड़ा हुआ है, जबकि अब तक 37 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, और 15 फीसदी कार्य पूरा करने के लिए तकरीबन छह करोड़ रुपये की और जरूरत है। 16 मई 2016 को इसकी नींव पड़ी। 43.76 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस कॉलेज के संपूर्ण निर्माण का जिम्मा सी एंड डीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइनिंग सर्विस) को दिया गया था।
विभागीय अभियंताओं ने काम भी पूरे जोश से शुरू किया, लेकिन इसी बीच सूबे में दूसरी सरकार का गठन हो गया। इसके बाद से ही शासन व रूसा (राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान) के सहयोग से पूरी होने वाली इस महत्वपूर्ण परियोजना की उपेक्षा भी शुरू हो गई। धीरे-धीरे भुगतान होता रहा और निर्माण कार्य भी उसी गति से चलता रहा। अब तक कई किश्तों में 37.09 करोड़ रुपये ही मिल सके। लिहाजा तकरीबन 85 फीसदी काम तो पूरा हो गया, लेकिन अन्य निर्माण न पूरे हो पाने के कारण युवाओं को इंजीनियर बनाने का सरकार का सपना अधूरा है।
मुख्य भवन का पांच फीसदी, टाइप वन आवास का 15 प्रतिशत, गर्ल्स हॉस्टल का 15 फीसदी, चहारदीवारी का 10 प्रतिशत, ट्यूबवेल और वाटर हेड टैंक का 15 फीसदी व टाइप एक, दो व तीन के आवासों का निर्माण बाकी रह गया है।
-जयप्रकाश यादव, साइट इंजीनियर, सी एंड डीएस।
मुख्य भवन व अन्य संसाधनों को तेजी से दुरुस्त किया जा रहा है। ताकि नए सत्र से पठन-पाठन शुरू कर दिया जाए। शासन से 6.34 करोड़ रुपये जारी होने हैं। धन के लिए पत्र भेजा गया है। जैसे ही धन उपलब्ध हो जाएगा, इंजीनियरिंग कॉलेज तैयार कर दिया जाएगा।
-विवेक कुमार, परियोजना प्रबंधक, सी एंड डीएस।