बस्ती। मेडिकल कॉलेज के ओपेक चिकित्सालय कैली में निर्माणाधीन नर्सिंग कॉलेज भवन के चहारदीवारी में अड़ंगा आ गया है। ओपेक चिकित्सालय परिसर की भूमि पर अतिक्रमण के चलते चहारदीवारी का निर्माण नहीं हो पा रहा है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इस मामले में जिला प्रशासन को चिट्ठी लिखकर मदद मांगी है। वहीं कार्यदायी एजेंसी यूपी सिडको की ओर से नर्सिंग कॉलेज भवन के निर्माण में भी काफी लेटलतीफी हो रही है। दिसंबर 2024 तक पूर्ण होने वाले इस भवन का निर्माण अभी भी लटका हुआ है।
मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के साथ ही नर्सिंग की पढ़ाई की सुविधा वर्ष 2024 में ही मिल गई थी। यहां नर्सिंग छात्रों का नामांकन भी दो साल से शुरू हो गया है। इस कॉलेज के पृथक भवन के लिए ओपेक चिकित्सालय कैली में जमीन आवंटित की गई। शासन से 10.08 करोड़ रुपये का बजट भी अवमुक्त हुआ। कार्यदायी एजेंसी यूपी सिडको को निर्माण की जिम्मेदारी मिली। तय हुआ कि दिसंबर 2025 तक भवन का निर्माण कार्य पूर्ण कर मेडिकल कॉलेज को हस्तांतरित किया जाएगा। ताकि वर्ष 2026 में नर्सिंग विद्यार्थियों की पढ़ाई और आवासीय सुविधा पृथक भवन में बहाल की जा सकें।
मगर कार्यदायी एजेंसी के लेटलतीफी के चलते निर्माण कार्य निर्धारित अवधि में नहीं पूरी हो सका। इधर, चहारदीवारी का निर्माण भी अधर में लटक गया है। ओपेक चिकित्सालय कैली की जमीन में अतिक्रमण के चलते चहारदीवारी का निर्माण नहीं हो पा रहा है। अभी हाल ही में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने जिला प्रशासन को चिट्टी लिखकर चहारदीवारी कराने में मदद मांगी है। अभी तक प्रशासनिक स्तर पर कोई पहल नहीं हुई है। इससे कार्यदायी एजेंसी को निर्माण कार्य पूर्ण न करने का एक ठोस बहाना भी मिल गया है।
उधर निर्माणाधीन भवन में भी अभी फिनिशिंग, फर्नीचर, विद्युतीकरण, रंगाई, जलापूर्ति आदि के कार्य बचे हुए हैं। पिछले महीने मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इस भवन का निरीक्षण भी किया था। इस दौरान भवन की प्रगति अच्छी न मिलने पर कार्यदायी एजेंसी से पत्राचार किया गया था। कार्यदायी एजेंसी यूपी सिडको ने भवन हस्तांतरण के लिए मार्च 2026 तक का समय मांगा। धीमी गति से निर्माण कार्य चल रहा है उस हिसाब से मार्च में भी इसके पूर्ण होने की संभावना कम है।
प्रधानाचार्य ने डीएम को लिखा था पत्र : 10 जनवरी को मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मनोज कुमार ने नर्सिंग कॉलेज भवन की चहारदीवारी में आ रही अड़चनों को लेकर पत्र लिखा था। इसके माध्यम से उन्होंने बताया कि चहारदीवारी के प्रस्तावित जमीन पर आसपास के खातेदारों ने अतिक्रमण कर लिया है। जिससे चहारदीवारी का निर्माण नहीं हो पा रहा है। परिसर में अवैध रूप से बाहरियों का आवागमन भी होता रहता है। भविष्य में यहां नर्सिंग छात्रों की पढ़ाई के साथ उन्हें आवास भी आवंटित किया जाना है। ऐसे में सुरक्षा की दृष्टिकोण से चहारदीवारी का निर्माण कराया जाना जरूरी है।
मेडिकल कॉलेज के भवन में हो रही नर्सिंग के छात्रों की पढ़ाई : नर्सिंग छात्रों के लिए पृथक भवन न होने के कारण मेडिकल कॉलेज भवन में इनकी पढ़ाई कराई जा रही है। नर्सिंग छात्रों को प्रैक्टिकल के लिए जब एमबीबीएस छात्रों का लैब खाली रहता है तब उसमें प्रवेश दिया जाता है। दो साल से अस्थायी व्यवस्था में इन छात्रों की पढ़ाई हो रही है।