डायलिसिस की इमरजेंसी हो तो न जाएं कैली
आपातकाल के जरूरतमंदों को जाना पड़ता है गोरखपुर या लखनऊ
अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है मेडिकल कॉलेज की यूनिट
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिला मुख्यालय के मेडिकल कॉलेज की अत्याधुनिक हिमो डायलिसिस सुविधा आपातकालीन जरूरतमंदों के लिए बेमतलब है। कारण यह कि यहां इमरजेंसी में यह सुविधा नहीं मिल सकती। ऐसे में इमरजेंसी हो तो मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय कैली कत्तई न जाएं। चूंकि जिले में हिमो डायलिसिस है ही नहीं, ऐसे में मरीज को मजबूरी में गोरखपुर अथवा लखनऊ जाना पड़ता है।
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध तीन सौ शैय्यायुक्त ओपेक चिकित्सालय कैली में डायलिसिस यूनिट करीब एक दशक पहले शुरू हुई। शुरुआती दौर में यह यूनिट कैली प्रशासन के पास थी। इसका संचालन डॉ. एमके सिन्हा करते थे। उनके स्थानांतरण के बाद यह यूनिट बंद हो गई। मेडिकल कॉलेज से संबद्धता के बाद इस यूनिट को प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप के माध्यम से शुरू किया गया। इस यूनिट के संचालन का काम हेरिटेल हॉस्पिटल को मिल गया। तब से वही इसका संचालन कर रही है।
इस यूनिट के प्रबंधक आयुष ने बताया कि हर दिन तीस लोगों का डायलिसिस होता है। यहां कितनी भी इमरजेंसी हो डायलिसिस नहीं हो सकता है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि यहां केवल दस बेड की यूनिट है। प्राचार्य ने यह भी कहा कि इमरजेंसी मरीजों की डायलिसिस यहां संभव नहीं है। उन्हें गोरखपुर या लखनऊ जाना चाहिए, क्योंकि डायलिसिस में इमरजेंसी की सुविधा नहीं है।
बोले फिजीशियन
मेडिसिन विभाग के चिकित्सक व डायलिसिस यूनिट के नोडल डॉ. बीएल कन्नौजिया ने कहा कि डायलिसिस में दो प्रकार के मरीज होते हैं। इनमें एक्यूट किडनी इंजरी व दूसरा क्रॉनिक किडनी डिजीज। इसमें दोनों ही प्रकार में इमरजेंसी हो सकती है, मगर अपने अस्पताल में ऐसे मरीजों को रेफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
यहां 97 पंजीकरण
आपातकाल के लिए बेमतलब ओपेक चिकित्सालय कैली की डायलिसिस यूनिट की व्यवस्था के अनुसार 97 मरीजों का पंजीकरण है। यहां नए मरीज के लिए अब कम से कम दस से बारह दिन इंतजार करना होगा।