बस्ती। जिला अस्पताल में मौसम में बदलाव के कारण इन दिनों सिर दर्द, पेट दर्द और संक्रमण के मरीजों में इजाफा हुआ है। जिला अस्पताल की ओपीडी औसतन प्रतिदिन एक हजार की है इसमें करीब 100 मरीज रोजाना सिर दर्द, माइग्रेन और नींद नहीं आने की समस्या वाले पहुंच रहे हैं। चिकित्सक परामर्श व दवा देकर घर भेज दे रहे हैं। हालांकि अस्पताल में काउंसलर और न्यूरो विशेषज्ञ के न होने से मरीजों को परेशानी हो रही है। वहीं, पेट में मरोड़, उल्टी-दस्त के साथ वायरल संक्रमण के भी रोगी आए।
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. एके दूबे ने बताया कि सिरदर्द, माइग्रेन और अनिद्रा आधुनिक जीवनशैली की गंभीर समस्याएं बन चुकी हैं, जिनसे बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हैं। ओपीडी में आने वाले 40 फीसदी से अधिक माइग्रेन रोगियों को नींद में खलल महसूस होती है और 60 फीसदी को सुबह जागने पर सिरदर्द की शिकायत होती है, जो तनाव, अनियमित दिनचर्या और हार्मोनल बदलावों से जुड़ी है।
उन्होंने बताया कि भाग-दौड़ भरी जिंदगी और तनावपूर्ण वातावरण का असर लोगों के मस्तिष्क पर पड़ रहा है। परिवार में भी लोग व्यस्त जिंदगी के कारण एक-दूसरे से बातचीत नहीं कर पाते हैं। इस बीमारी का दूसरा प्रमुख कारण लोगों का खुलकर बात नहीं करना भी सामने आया है। कम उम्र के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक यह समस्या आम हो रही है। ऐसे करीब 100 से अधिक मरीज रोजाना जिला अस्पताल की ओपीडी में उपचार के लिए आ रहे हैं।
मनो चिकित्सक के अनुसार, ऐसे मरीजों को परामर्श के बाद मिलने वाली दवाओं की जांच भी बेहद जरूरी हो जाती है। मरीज को दी जाने वाली दवा का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए और सही प्रकार की दवा मिले, इसका विशेष ध्यान रखना होता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएस पटेल ने बताया कि बच्चों में दस्त, उल्टी और पेट में संक्रमण की शिकायत है। फिजीशियन डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि मेडिसिन विभाग में 50 प्रतिशत मरीजों में उल्टी-दस्त की शिकायत है। यह बदलते मौसम का असर है। सर्दी-खांसी, जुकाम व बुखार के भी रोगी आए। सोमवार को ओपीडी में 1145 मरीजों ने परामर्श लिया। अधिकांश मरीज, मनो रोग, मेडिसिन व बाल रोग के रहे।
दवा लेने में बरतें सावधानियां
सिरदर्द, माइग्रेन और अनिद्रा वाले मरीजों को दवा के सेवन में विशेष सावधानी बरतनी होती है। डॉ. एके दूबे बताते हैं कि परामर्श के बाद मरीजों को लिखी दवा का मिलान करना पड़ता है कि उन्हें कौन-सी दवा मिली है। दवा के पैकेट पर हर दवा के सेवन के तरीके को बताना पड़ता है। किसी मरीज को ज्यादा परेशानी होने पर उसके साथ आने वाले तीमारदार को भी जानकारी दी जाती है। उन्होंने सलाह दी कि दवा के सेवन के दौरान मरीज के स्वास्थ्य में कोई विशेष बदलाव होने पर तत्काल चिकित्सक से परामर्श लें।
ये हैं बचाव के उपाय
डॉ. एके दूबे के अनुसार, सिरदर्द, माइग्रेन और अनिद्रा से बचने के लिए एक अनुशासित जीवनशैली अपनाना सबसे प्रभावी तरीका है। मुख्य उपायों में हर दिन एक ही समय पर 7-8 घंटे की गहरी नींद लेना, प्रतिदिन कम से कम 2 लीटर पानी पीना, तनाव कम करने के लिए योग या ध्यान करना और नियमित संतुलित आहार लेना शामिल है।