बस्ती। नया शैक्षिक सत्र शुरू हुए तीन माह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक अभिभावकों के बैंक खातों में ड्रेस, जूता-मोजा का धन नहीं आया है, जिस कारण बच्चे पुराने ड्रेस, जूता-मोजा और बैग लेकर आ रहे हैं। अधिकारी जल्द ही डीबीटी की धनराशि शासन स्तर से जारी होने की बात कह रहे हैं।
जिले में 1747 प्राथमिक, 639 उच्च प्राथमिक और 319 संविलियन विद्यालय और 13 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें 1.81 लाख के लगभग बच्चे पढ़ रहे हैं। प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के छात्र-छात्राओं के लिए शासन उनके अभिभावकों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से 1200 रुपये भेजती है।
इस धनराशि से छात्रों के अभिभावक दो जोड़ी ड्रेस, जूता-मोजा, बैग और पेंसिल-रबर, पेन खरीदते हैं, लेकिन वर्तमान शैक्षिक सत्र को शुरू हुए तीन माह से अधिक समय हो चुका है, अभी तक डीबीटी के माध्यम से रुपये नहीं आए हैं।
इस कारण छात्र-छात्राएं पुरानी ड्रेस, जूता-मोजा और बैग लेकर ही आ रहे हैं। वहीं कुछ छात्र-छात्राएं तो ऐसे हैं, जो बिना ड्रेस के ही विद्यालय पहुंच रहे हैं। शिक्षकों के बिना ड्रेस विद्यालय आने का कारण पूछने पर छात्र-छात्राएं जवाब देते हैं कि उनकी ड्रेस फट चुकी है। इस कारण से वह बिना ड्रेस के आ रहे हैं।
शिक्षक नेता बाल कृष्ण ओझा ने कहा कि शैक्षिक सत्र शुरू होते ही बच्चे नए ड्रेस, जूते-मोजे व बैग लेकर स्कूल आते हैं तो उनके मन में अलग उत्साह रहता है। समय से ड्रेस जूता मोजा और बैग के रुपये न मिलने के कारण स्कूलों बच्चों के उपस्थिति पर असर पड़ रहा है। स्कूल ड्रेस न होेने के कारण अधिकतर बच्चे स्कूल आने में आनाकानी करते हैं।
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जिन बच्चों का डाटा प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड हो चुका है। उनका मुख्यालय को भेजा जा चुका है। डीबीटी की धनराशि जल्द ही शासन के द्वारा छात्रों के अभिभावकों के खातों में पहुंचा दी जाएगी।
-अनूप कुमार तिवारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी