नगर क्षेत्र में मोहर्रम के लिए तहजिया बनाते हुए।
बस्ती। मोहर्रम का चांद बुधवार को नजर आते ही ताजियादार ताजिया बनाने में जुट गए हैं। इस्लाम धर्म के मुताबिक नए साल की शुरुआत मोहर्रम माह से होती है। इसी महीने में पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी। इमाम हुसैन की याद में मुस्लिम समाज के लोग हर साल मोहर्रम का जुलूस निकालते हैं। मोहर्रम पर मुसलमान पैगंबर मोहम्मद के नवासे की शहादत का गम मनाते हैं।
शहर के गांधी नगर, कटरा, पुरानी बस्ती, मंगल बाजार, राजा मैदान, राजा बाजार, इटैलिया, दसकोलवा सहित जिले के विभिन्न इलाकों में ताजिया बनाई जाने लगी है। ताजियादार मो. वारिस ने बताया कि मोहर्रम पर ताजिया के जुलूस को लेकर तैयारियां हो रही हैं। मुसलमान अलग-अलग इलाकों में सतरंगी ताजियों का निर्माण करने में जुटे हैं। कारीगरों की मदद से दिन-रात एक करके मेहनत और लगन के साथ सुंदर ताजिये बनाई जा रही हैं। कहीं थर्माकोल तो कहीं रंगीन पेपर पर सजावटी सामान से नक्काशीनुमा डिजाइन बनाई जा रही है। मो. शकील, शौव्वाल अहमद व नवाजिस अली, मो. आबिद, फिरोज अहमद आदि ताजियों का निर्माण कर रहे हैं।
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इसलिए कहते हैं गम का महीना
सन 61 हिजरी (680 ईस्वी) में इराक के कर्बला में पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन को उनके 72 साथियों के साथ शहीद कर दिया गया था। मोहर्रम में इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत पर गम मनाते हैं, गिरिया (रोना) करते हैं।