घाट पर मिले दुर्गेश के बैग में मिली थी डिप्रेशन की दवाओं के कई पत्ते
संवाद न्यूज एजेंसी
कलवारी। अहमदाबाद से लौटे दुर्गेश के सरयू नदी में कूदकर जान देने पर सवाल उठ रहे हैं। मगर, किसी के पास फिलहाल जवाब नहीं है। उसने किन परिस्थितियों में ऐसा कदम उठाया, इसे लेकर लोगों में सबसे अधिक चर्चा है।
अहमदाबाद में साथ रहने वालों से भी अभी कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। अकबरपुर रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद दुर्गेश कहीं और गया या सीधे बस में बैठ गया था, इसका जवाब भी न तो पुलिस के पास है न परिवार वाले कुछ बता पा रहे हैं।
दुर्गेश के चाचा राजदेव उपाध्याय ने बताया कि उन लोगों को विश्वास नहीं हो रहा है कि दुर्गेश ने आत्महत्या कर ली है। वह बताते हैं कि दुर्गेश पिछले पांच वर्षो से गुजरात के भरूच में रहकर धागा कंपनी में काम करता था। छह माह पहले घर आया था तो दवा ले रहे थे। जब घर के लोगों ने पूछा तो बताया कि मानसिक उलझन है। नींद सही से नहीं आती है।
लोगों ने समझाया था कि घर पर ही रहकर इलाज कराओ, लेकिन कंपनी से बार-बार फोन आने के कारण वह चला गया था। रविवार को उसका बैग मिला तो उसमें भी कई पत्ते डिप्रेशन की दवा के कई पत्ते मिले। इससे माना जा रहा है कि वह अवसाद में था। चाचा बताते हैं कि उसे कोई समस्या थी तो बताना चाहिए था। पोस्टमार्टम के बाद सोमवार को माझा खुर्द घाट पर स्थित मुक्तिधाम पर शव का अंतिम संस्कार उसके चाचा तरुण उपाध्याय ने किया।