पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचे सरयू नदी में डूबने से मृत दोनों किशोरियों के परिवार के लोग
बस्ती। सरयू घाट पर डूबने से हुई मौत के बाद भंगुरा के दो परिवारों में कोहराम मचा है। पानी में डूबीं दोनों सहेलियों ने इसी वर्ष गांव के प्राथमिक विद्यालय से पांचवीं कक्षा उत्तीर्ण की थीं। परिवार के लोग चाहते थे कि दोनों पढ़ लिखकर आगे बढ़ें लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर सरयू नदी के विभिन्न घाटों पर आसपास के तमाम गांवों के लोग स्नान करने जाते हैं। इस दिन वहां मेले जैसी चहल-पहल रहती है। भंगुरा के राकेश भी इस बार वहां जाने के लिए तैयार हो गए। उनके साथ नहाने जाने के लिए भतीजी शिव कुमारी भी तैयार हो गई। शिव कुमारी तैयार हुई तो उसकी खास सहेली नैना भी कैसे मानती। उसने भी अपने पिता अनिल कुमार अग्रहरि से शिवकुमारी के साथ जाने की इजाजत ले ली। गांव के कुछ अन्य लोगों के साथ वे सभी आस्था और खुशी का भाव लिए सरयू घाट पर पहुंचे। किसी ने बताया था कि सुबह नौ बजे तक ही पूर्णिमा रहेगी,इसलिए राकेश तड़के ही घर से निकल लिए थे। सूरज निकलने से पहले वे लोग घाट पर पहुंच गए थे।
हादसे से विह्वल राकेश बताते हैं कि उन्होंने बच्चियों को पहले स्नान कर लेने को कहा। दोनों नहाने के लिए जैसे ही नदी में उतरीं,इसके दो मिनट के भीतर ही डूबने लगीं। तभी उनकी नजर पड़ गई। वह शोर मचाने लगे लेकिन तभी दोनों पानी में समा गईं। कुछ वर्ष पहले शिवकुमारी के पिता प्रमोद की हादसे में मौत हो चुकी है। उसकी पत्नी मीरा पांव से दिव्यांग है। इनकी दो बेटियों में अंशिका बड़ी है। शिव कुमारी दूसरी बेटी थी। राकेश ही पूरे परिवार की देखभाल करते हैं।
बेटी की मौत से सदमे में परिवार
- हादसे में जान गंवाने वाली नैना के पिता अनिल कुमार अग्रहरि की माली हालत ठीक नहीं है। वह साइकिल से फेरी करके बच्चों के कपड़े, चप्पल, खिलौने आदि बेच कर परिवार पालते हैं। उनके पांच बच्चे हैं, जिसमें चार बेटियां व एक बेटा है। बड़ी बेटी प्रिया, दूसरी नैना, मानवी, गोलू, व भोलू है।
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