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Basti News: कटान के डर से अपने ही घर पर चलवा रहे बुलडोजर

Thu, 22 Aug 2024 12:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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मईपुर और मदरहवा में बचाव कार्य में जुटी बाढ़ खंड की टीम
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एक दर्जन परिवार मवेशी और सामग्रियों के साथ तटबंध पर लिए हैं शरण
संवाद न्यूज एजेंसी
गायघाट (बस्ती)। कलवारी-रामपुर तटबंध के दक्षिण स्थित बैराड़ी एहतमाली के मईपुर और महुआपार कला के मदरहवा गांव में सरयू नदी की कटान की स्थिति भयावह होती जा रही है। बुधवार को एक विशाल पीपल का पेड़ नदी की धारा में समा गया। कई घरों से सटकर नदी बहने लगी। इससे लोग दहशत में आ गए। लोग घर-गृहस्थी उजाड़कर सुरक्षित ठौर पर पहुंच रहे हैं। कटान के डर से ग्रामीण अपने पक्के मकान तोड़कर ईंट और घरेलू सामान सुरक्षित स्थान पर पहुंचा रहे हैं।
दर्जन भर परिवार अपने घरों के सामान और मवेशी के साथ तटबंध पर खुले आसमान के नीचे गुजर-बसर कर रहे हैं। मदरहवा गांव को कटान से बचाने के लिए नेपाल और लखीमपुर खीरी आदि जगहों से करीब 150 मजदूर बुलाए गए हैं। बोरियों में मिट्टी और बंबू बनाकर नदी के किनारे डाला जा रहा है। पीड़ितों का कहना है कि यदि प्रशासन पहले से अलर्ट हो गया होता और बचाव कार्य शुरू करा दिया गया होता तो इतनी भयावह स्थिति नहीं होती।
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सरयू नदी बुधवार को भी तेजी के साथ कटान कर रही थी। नदी कटान करते हुए सुरेंद्र पासवान के घर के करीब पहुंच गई है। इससे डरकर सुरेंद्र ने अपने पक्के मकान को तोड़कर ईंट सुरक्षित स्थान पर पहुंचवा दिया। उनके पूरे परिवार में उजड़ने का गम छाया हुआ है। वहीं गंगाराम पासवान भोले ने बताया कि घर को खाली कर सामान बैराड़ी कस्बे में चार हजार रुपये पर किराये का मकान लेकर सुरक्षित किया है। राजकुमार, राधेश्याम, रमेश, शांति, राकेश, ज्ञानचंद आदि अपने सामान, मवेशी और परिवार के साथ रामपुर तटबंध पर शरण लिए हुए हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि आंदोलन के बाद प्रशासन सिर्फ कटान की रोकथाम का ही प्रयास कर रहा है। बाढ़ पीड़ितों में किसी तरह की राहत सामग्री वितरित नहीं की जा रही है। जबकि घर- गृहस्थी उजड़ने से भोजन के लाले पड़ गए हैं। खाना पकाने के लिए अनाज और सूखी लकड़ियां तक नहीं मिल पा रही हैं।
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रेत की बोरियों से धारा मोड़ने की कोशिश
24 घंटे से यहां बाढ़ खंड की टीम कटान रोधी सामग्रियों के साथ बचाव कार्य में जुटी है। मगर, ग्रामीणों में दहशत बरकरार है। बाढ़ खंड की ओर से नदी की धारा को मोड़ने के लिए प्लाॅस्टिक की बोरियों में बालू और ईंट रखकर डाला जा रहा है। इसके लिए अनुभवी मजदूरों को लगाया गया है। लखीमपुर से आए मजदूर संतोष कुमार, मनीष, लालता, सूरज, प्रहलाद, सुरेश आदि को इससे पहले टक़टकवा, कटरिया चांदपुर और सीतापुर, पीलीभीत में कटान रोकने में सफलता मिली थी।
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