बस्ती। जलकल के जिम्मेदारों की लापरवाही से शहर की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था लड़खड़ा चुकी है। टंकियों की न तो लंबे समय से सफाई हो सकी है, और न ही पानी की जांच कराई जा रही है। लिहाजा शहरी लोग दूषित पानी पीकर बीमार पड़ रहे हैं।
शहर की कुल 1.36 लाख आबादी के लिए सात ओवरहेड टैंक हैं। इनसे प्रतिदिन लगभग 20 एमएलडी जलापूर्ति की जाती है। जिस पानी को नागरिक शुद्ध समझकर पीने व भोजन बनाने से लेकर नहाने, कपड़े धोने तक इस्तेमाल करते हैं, वह पानी दूषित है। क्योंकि जिन टंकियों से यह पानी आ रहा है उसकी वर्षों से साफ-सफाई नहीं हुई है। यही नहीं कोरोना काल के बाद से इनकी न तो नियमित सफाई की गई है, और न ही पानी की स्वच्छता की जांच कराई जा रही है।
गैस आपूर्ति की पाइपलाइन ने बढ़ाई मुश्किलें
एक तरफ जहां जलकल की लापरवाही से वाटर हेड टैंक की सफाई व पानी की जांच प्रभावित हो रही है, वहीं विभाग में अनुभवी कर्मियों की कमी बनी हुई है। अनुभवी कर्मियों की कमी से समय से पाइपलाइन सुधारी नहीं जाती और जब तक किसी तरह से जलापूर्ति पटरी पर आती है तो दूसरी जगह पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो जाती है। इससे संबंधित तीन माह में कुल 120 शिकायतेें जलकल विभाग में दर्ज कराई जा चुकी हैं। इससे यह साबित होता है कि शहर का हर कोना दूषित पानी पीने को मजबूर हो रहा है।
दूषित पानी से होती हैं बीमारियां
जिला अस्पताल के चिकित्सक डाॅ. अंकित चतुर्वेदी ने बताया कि दूषित पानी पीने से पेट संबंधी रोग हो सकते हैं, और पेट से ही अन्य बीमारियां भी हो जाती हैं। इसलिए पानी का शुद्ध होना बहुत जरूरी है। दूषित पानी से जल जनित रोग, मस्तिष्क ज्वर व अन्य रोग जैसे- इंसेफलाइटिस सिंड्रोम आदि की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए शुद्ध पानी शरीर के लिए बहुत ही आवश्यक है।
छह महीने के अवकाश पर हैं जलकल अभियंता
जलकल अभियंता अर्चना कुमारी मातृत्व अवकाश पर हैं। प्रभारी अभियंता दिनेश वर्मा ने बताया कि सभी वाटर हेड टैंकों में ब्लीचिंग मिक्स करवाया जा रहा है, और शिकायतों को दर्ज कर लीकेज दुरुस्त करवाया जा रहा है। सभी वाटर हेड टैंकों से नियमित जलापूर्ति कराई जा रही है। सफाई के लिए अलग से बजट नहीं आता है, टैंकों की सफाई कराकर विभाग में बिल जमा करना होता है। इसके बाद भुगतान हो जाता है।
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नागरिकों ने सुनाई पीड़ा
साल भर से घर में दूषित जल आ रहा है। पूरा परिवार पेट के रोग से परेशान है। चिकित्सक को दिखाया तो पता चला कि दूषित पानी का सेवन किया जा रहा है। लिहाजा घर में आरओ लगवाना पड़ा।
विवेक प्रजापति, सिविल लाइंस
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जब से गैस पाइपलाइन बिछी तब से गंदा पानी आ रहा है। कई बार शिकायत की गई, एक बार एक कारीगर आया और वह पाइपलाइन ठीक नहीं कर सका। जाते-जाते कह गया कि दूसरा कारीगर आकर ठीक कर पाएगा। उसके बाद से कोई नहीं आया।
-पवन कुमार शुक्ला, रौतापार
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हमारे घर के पास मालवीय रोड पर कई बार पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई और दूषित जलापूर्ति हुई। कई-कई दिनों तक हम लोग दूषित जल पीते रहे। नतीजतन पेट संबंधी समस्याएं बढ़ गईं। इधर कुछ दिन पहले पानी में कीड़े भी दिखाई दिए। प्राइवेट प्लंबर से पाइपलाइन दुरुस्त कराया, तब जाकर राहत मिली।
-प्रदीप श्रीवास्तव, बैरिहवा
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पहले हम लोग वाटर सप्लाई का पानी ही पीने से लेकर खाना बनानें में उपयोग करते थे। इधर कुछ दिन पहले स्वयं बीमार पड़ गया तो चिकित्सक ने उबाल कर पानी पीने की सलाह दिया। अब घर में वाटर फिल्टर लगाकर पानी शुद्ध करके पीते हैं।
-प्रदीप सिंह, गांधीनगर
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यह संज्ञान में है कि यहां लंबे समय से ओवरहेड टैंकों की सफाई नहीं हुई है। 15 सितंबर के बाद सफाई कराने की रूपरेखा तय की गई है।
-दुर्गेश्वर त्रिपाठी, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद