संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कर्कश साउंड सिस्टम न केवल बहरा बना देगा, बल्कि उसकी लेजर लाइट अंधा भी बना देगी। तीव्र रोशनी आंख की रेटिना पर सीधे जाकर चुभती है।
नेत्र रोग विशेषज्ञों का कहना है कि लेजर के पास और दूर दोनों जगहों पर एक जैसा खतरा रहता है। लेजर किरणें आंखों की रेटिना पर एक छोटे और तीव्र बिंदु पर केंद्रित होती हैं, जिससे जलन या अंधेपन की समस्या हो सकती है। डाॅक्टरों के पास ऐसे मरीज पहुंचने लगे हैं। जिन्हें आंख में जल-चुभन की परेशानी है।
जिला अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे भूअर के निवासी शिवमूरत ने बताया कि दो दिन पहले वह गांव की बरात में गए थे। वहां डीजे पर लेजर लाइट लगी हुई थी। वह उसी के आगे-पीछे चल रहे थे। उस समय अहसास नहीं हुआ, लेकिन सुबह से आंख में लालिमा छाई है, और ऐसा लग रहा है जैसे कोई रवा पड़ गया हो।
मेडिकल कॉलेज के डॉ. आशीष नारायण त्रिपाठी बताते हैं कि लेजर किरणों के आधुनिकीकरण और इसकी तीव्रता बढ़ने के कारण लोगों की आंखों को सबसे ज्यादा खतरा है। इन लेजर किरणों की तीव्रता अधिक होती है, इसलिए रेटिना को सबसे अधिक खतरा होता है। इसलिए इन किरणों की पहुंच में सावधानी बरतनी चाहिए।
इस वजह से हानिकारक है लेजर लाइट: भौतिक विज्ञानी डाॅ. शंभू प्रसाद बताते हैं कि लेजर प्रकाश की किरणें सघन होती हैं, और दूरी बढ़ने के साथ आकार में नहीं बढ़तीं। इसका मतलब है कि लेजर के पास और दूर दोनों जगहों पर एक जैसा खतरा रहता है। लेजर किरणें आंखों की रेटिना पर एक छोटे और तीव्र बिंदु पर केंद्रित हो सकती हैं, जिससे जलन या अंधेपन की समस्या हो सकती है।
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