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जन औषधि केंद्र में उपलब्ध दवाएं नहीं लिखते डॉक्टर

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जिला महिला अस्पताल का जन औषधि केंद्र। - फोटो : BASTI
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जन औषधि केंद्र में उपलब्ध दवाएं नहीं लिखते डॉक्टर
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लाखों रुपये की दवाएं हो जाती हैं एक्सपायर, अब 130 किस्म की दवाएं बचीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जन औषधि केंद्र पर उपलब्ध दवाएं लिखने से डॉक्टर कतराते हैं। ऐसे में लाखों रुपये की दवाएं एक्सपायरी हो जाती हैं। यह आरोप जन औषधि केंद्र के संचालकों का है। उनका कहना है कि नुकसान से बचने के लिए अब आवश्यक दवाएं ही मंगाई जाती है। केंद्रों पर 800 में से मात्र 130 किस्म की दवाएं बची हैं।
जिला मुख्यालय पर स्थित महिला व जिला अस्पताल तथा ओपेक हॉस्पिटल कैली में जन औषधि केंद्र हैं। यहां दवाएं सस्ती हैं, मगर मरीज न के बराबर आते हैं। जन औषधि केंद्र पर खांसी, सर्दी जुकाम, दस प्रकार की एंटीबॉयोटिक, दर्द, आयरन, कैल्शियम, कीड़े की दवा के अलावा सभी प्रकार के जीवन रक्षक दवाओं की भरमार है, मगर इस केंद्र पर न तो अस्पताल से किसी डॉक्टर की पर्ची आती है और न ही निजी डॉक्टर सस्ती दवाएं लिखते हैं।
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बृहस्पतिवार को जब महिला अस्पताल स्थित जन औषधि केंद्र का हाल जाना गया तो पता चला कि माह भर में मात्र तीस मरीज यहां आए हैं, वह भी बाहर की दवा की पर्चा लेकर। इन्हें सभी दवाएं दी गईं। केंद्र पर तैनात कर्मी ने बताया कि जन औषधि केंद्र की दवाएं डॉक्टर क्यों नहीं लिखते हैं, यह किसी को बताने की जरूरत नहीं है। यहां दवाएं सस्ती हैं, इसका कारण किसी को कोई कमीशन नहीं दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि सरकार जन औषधि केंद्रों को दवा आपूर्ति करने वाली कंपनियों की आर्थिक सहयोग करती है। इन दवाओं पर कोई टैक्स नहीं है। उसने बताया कि सुबह से दोपहर हो गई है, अब तक एक भी पर्चा यहां नहीं आई है। जबकि बाहर की दुकानों पर मरीजों की लाइन लगी है।
यही हाल जिला अस्पताल व ओपेक हॉस्पिटल कैली की जन औषधि केंद्र पर देखने को मिला। यहां के कर्मी बताते हैं कि एक साल तक दवाओं की कमी थी, मगर अब जो डिमांड भेजी जा रही है, वह दवा मिल रही है, मगर बिक्री ही नहीं है।
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कोट
जन औषधि केंद्र पर मौजूद दवाओं को लिखने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत की दवाएं यहां जल्द मिल नहीं पाती हैं, इसीलिए चिकित्सक जेनरिक दवाएं नहीं लिखते हैं। जन औषधि केंद्र की दवाओं की जानकारी चिकित्सकों को देकर उन्हें दवा लिखने के लिए कहा जाएगा।
डॉ. एके गुप्ता, प्रभारी सीएमओ
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