सुविधा शुल्क लेने वाले डीएलएड कालेज की मान्यता रद्द होगी
बस्ती। डीएलएड कोर्स कराने के नाम पर मनमानी करने वाले निजी कालेज की मान्यता रद्द करने की तैयारी चल रही है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय ने सूबे के ऐसे पांच कालेजों की मान्यता रद्द करने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इसमें प्रशिक्षुओ से लाखों रुपए सुविधा शुल्क के नाम पर ले लिया है। जिसमें गाजीपुर के दो, मेरठ, कौशांबी व देवरिया के एक-एक कॉलेज इन कॉलेज की मान्यता रद्द करने की संस्तुति जिला स्तर से मिल चुकी है। शासन की अनुमति मिलने के बाद मान्यता रद्द कर दी जाएगी। हालांकि अपने जिले का भी एक मामला सुविधा शुल्क का सामने आया है, जिसकी जांच डीएम आशुतोष निरंजन ने शुरू करा दी है।
डीएलएड कॉलेज चलाने के लिए राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद से मान्यता के साथ प्रदेश सरकार से संबद्धता लेनी होती है। जो परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय से जारी करता है। डीएलएड की वार्षिक फीस 42 हजार रूपये है। लेकिन निजी कालेज इसके अलावा उपस्थिति लगाने के नाम पर प्रति वर्ष 10 से 25 हजार रूपये, शिक्षण शुल्क् के लिए 15 से 30 हजार, प्रैक्टिकल, एडमिट कार्ड, आईकार्ड और सेमेस्टर परीक्षा का फार्म भराने से लेकर नकल कराने के लिए सुविधा शुल्क के नाम पर रूपये वसूलते हैं। यह रकम जिले और कालेज के अनुसार कम या अधिक हो सकती है। सुविधा शुल्क न मिलने पर कालेज प्रशासन प्रशिक्षुओ का परेशान करते हैं। जिले में एक ऐसा ही मामला 22 नवंबर को संतराम चौधरी श्रीमती राजकली देवी दसिया में सामने आया है। यहां डीएलएड कर रहे प्रशिक्षुओं ने प्रैक्टिकल के नाम पर सुविधा शुल्क मांगने का आरोप लगाया। इस मामले को लेकर प्रशिक्षुओं ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया था। आल बीटीसी डीएलएड वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव आयुष शुक्ला ने आरोप लगाया कि कालेज प्रशासन की ओर से प्रशिक्षुओं कोत हप्तमेशा परेशान किया जाता है। सुविधा शुल्क न देने पर उनका प्रवेश पत्र रोका जाता और प्रैक्टिकल में फेल करने की धमकी दी जाती है। जिसको डीएम आशुतोष निरंजन ने संज्ञान मे लेते एएसडीएम जगदंबा को जांच के निर्देश दिए हैं। एसडीएम अपनी रिपोर्ट डीएम को देंॎगे। जांच अधिकारी ने जांच की पुष्टि करते हुए कहा कि जांच की जा रही है। निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट दे दी जाएगी।