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समाज का विभाजन स्वीकार्य नहीं : रामभद्राचार्य

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महर्षि वशिष्ठ आश्रम बढ़नी मिश्र में वशिष्ठ रामायण कथा सुनाते जगद्गुरु रामभद्राचार्य। स्रोत आयोजक
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बस्ती। महर्षि वशिष्ठ आश्रम बढ़नी मिश्र में वशिष्ठ रामायण कथा के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि गुरु गृह गए पढ़न रघुराई, अल्प काल विद्या सब आइ, साक्षात ईश्वर अपने चारों भाइयों के साथ गुरु वशिष्ठ के आश्रम में शिक्षा लेने आए, जिससे ईश्वर ज्ञान प्राप्त करे वह गुरु वशिष्ठ साधारण नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि सरकार को यूजीसी का नया नियम वापस लेना ही होगा। समाज का विभाजन स्वीकार्य नहीं हैं।
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रामभद्राचार्य ने कहा कि गुरु वशिष्ठ, माता अरून्धती ने विश्व कल्याण के लिए अनेक पद्धतियों को जन्म दिया। उन्होंने बताया कि 20 फरवरी को दोपहर 12 बजे से गुरु वशिष्ठ, माता अरून्धती, श्रीराम, लक्ष्मण, भरत-शत्रुघ्न और विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा होगी। कहा कि वे बढ़नी मिश्र गांव की अपनी आध्यात्मिक विशेषता है। गुरु वशिष्ठ ने निषाद राज को आदर दिया। कहा कि द्रोणाचार्य ने कर्ण को शिक्षा देने से मना न किया होता तो महाभारत न होता।
कथा के यजमान चंद्रभूषण मिश्रा, दिनेश मिश्रा, मीरा मिश्रा, राम चरन मिश्रा, राधे रमण मिश्रा, पावन उपाध्याय, वंदना को आचार्य रामचन्द्रदास जी महाराज ने चरण पादुका पूजन कराया। आयोजक राना दिनेश प्रताप सिंह और कमेटी के सदस्यों ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य को माल्यार्पण किया।
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