फोरलेन पर डायवर्जन के बाद साइड लेन से गुजरते भारी वाहन- संवाद
बस्ती। राम मंदिर में 25 नवंबर को होने वाले ध्वजा-स्थापना कार्यक्रम एवं प्रधानमंत्री के आगमन को देखते हुए लागू किए गए 69 घंटे के फोरलेन डायवर्जन का व्यापक असर सोमवार से साफ दिखने लगा। मुख्य मार्गों पर दबाव बढ़ गया है, जबकि वैकल्पिक रूटों पर जगह-जगह जाम की स्थिति बनी रही। आम जनजीवन से लेकर व्यापारियों तक, हर वर्ग इस व्यवस्था से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुआ है। फुटहिया सहित कई डायवर्जन प्वाइंट पर वाहनों की लंबी कतार देखी गई।
उधर, भारी वाहनों की एंट्री रोक दिए जाने के कारण रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुओं की सप्लाई चेन लड़खड़ाने लगी है। सब्जी, दूध, किराना, दवा और निर्माण सामग्री की आपूर्ति सामान्य से काफी धीमी हो गई है। कई दुकानदारों का कहना है कि माल लाने वाली पिकअप और ट्रक वैकल्पिक रास्तों पर फंसे रहने के कारण समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। मंडी के दुकानदार राहिल बताते हैं कि इससे थोक मंडियों में स्टॉक कम होने लगा है और कई सामानों के दाम बढ़ने के संकेत मिलने लगे हैं।
वहीं, शहर के अंदर भी मूवमेंट प्रभावित हुआ। जाम के कारण मरीजों को अस्पताल पहुंचने में देरी हुई। कई अभिभावकों ने शिकायत की कि स्कूल-बस रूट बाधित होने से बच्चों को देर से स्कूल पहुंचना पड़ा और वापसी में भी परेशानी उठानी पड़ी।
वीआईपी डायवर्जन से ग्रामीण कनेक्टिविटी भी सबसे ज्यादा प्रभावित हुई, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग रोजगार, इलाज और बाजार की खरीददारी के लिए बस्ती-अयोध्या फोरलेन पर निर्भर हैं। डायवर्जन की वजह से आसपास के इंटरनल मार्गों पर वाहन क्षमता से कई गुना अधिक दबाव आ गया है, जिससे संकरी सड़कों पर लगातार जाम लगता रहा। विक्रमजोत, छावनी, परशुरामपुर और हर्रैया क्षेत्रों में वाहनों की धीमी रफ्तार लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनी रही।