- निचले स्तर के अधिकारी लगा दे रहे निस्तारण की रिपोर्ट, जिले को प्रदेश में मिला 11वां नंबर
- डीएम कार्यालय से लेकर तहसीलों तक कम नहीं हो रही फरियादियों की भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। ऑनलाइन शिकायतों के निस्तारण में जबरदस्त तेजी आई है। एंटी भू-माफिया पोर्टल और आईजीआरएस पर प्राप्त शिकायतों को माह भीतर ही निस्तारित दिखा दिया जा रहा है। जबकि आम फरियादियों की समस्या जस की तस बनी हुई है। डीएम कार्यालय से लेकर तहसीलों तक प्रार्थनापत्र लिए फरियादी दौड़ लगा रहे हैं। उधर, ऑनलाइन रिपोर्ट में सबकुछ ठीक चल रहा है।
एंटी भू-माफिया पोर्टल पर शिकायतों का निस्तारण कागज में कर रिपोर्ट लगाकर उच्चाधिकारियों को प्रेषित कर दी जा रही है। इसमें जिले का रैंक भी सुधर रहा है। पोर्टल पर जिले भर से अब तक मिली 3580 शिकायतों में से 3250 को निस्तारित कर दिया गया है। हालांकि, असलियत इससे बिल्कुल अलग है। डीएम कार्यालय से लेकर तहसीलों तक रोज अच्छी तादाद में फरियादी शिकायतों के साथ पहुंच रहे हैं। जिले में 26 लोगों को भू-माफिया घोषित किया गया है। इनके खिलाफ दर्ज शिकायतों पर कार्रवाई की रफ्तार काफी धीमी है।
डीएम कार्यालय में जमीन की खरीद-फरोख्त करने वाले 13 लोगों का नाम भू-माफिया में दर्ज है। इसके अलावा चार तहसीलों में इस तरह के 13 नाम शामिल किए गए हैं। मगर, इन सभी की ओर से किए गए जमीनों पर कब्जे को प्रशासनिक अमला खाली नहीं करा सका। कागज में आदेश तो दे दिया जाता है, लेकिन जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
आदेश जारी होने के बाद प्रशासनिक अमला सुस्त पड़ जाता है। इसी का लाभ लेकर माफिया आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट और निचली अदालतों से स्थगन आदेश हासिल कर लेते हैं। फिर पूरा मामला कानूनी दांव पेच में उलझकर रह जाता है। मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद जिला प्रशासन भू-माफिया पर शिकंजा कसने की तैयारी में जुट गया है, लेकिन अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
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बिना जांच के ही हो रहा निस्तारण
पोर्टल की शिकायतों के निस्तारण पर पीड़ित सवाल खड़े कर रहे हैं। उनका कहना है कि बिना किसी जांच के ही शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। बुधवार को सदर तहसील में आए फरियादी मंझरिया के राधेश्याम ने कहा कि पोर्टल पर उनकी शिकायत का निस्तारण दर्शाया गया है, मगर समस्या जस की तस है। जांच कब हुई उन्हें कुछ भी पता नहीं है। इसी तरह सॉऊघाट क्षेत्र के देवीशरण, श्रीपालपुर के राम अजोर ने कहा कि ऑनलाइन शिकायत का कोई मतलब नहीं रह गया है। इधर शिकायत करिए उधर कुछ दिन बाद निस्तारित होने की रिपोर्ट लग जा रही है।
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भू-माफिया की सूची में बदलाव नहीं
जिला प्रशासन के अभिलेख में पांच वर्ष पहले बनी भू-माफिया की सूची में सिर्फ 13 नाम थे। यह आज भी बरकरार हैं। इनमें न तो किसी को निकाला गया और न ही किसी का नाम जोड़ा गया। हालांकि, चारों तहसीलों में 13 अन्य भू-माफिया की सूची तैयार की गई है। दरअसल, निचले स्तर पर तैनात लेखपाल और राजस्व निरीक्षक हल्का क्षेत्र में दूसरों की जमीन या सरकारी, सार्वजनिक उपयाेग की जमीनों पर काबिज लोगों को चिह्नित नहीं कर रहे हैं। यदि गांव-गांव निष्पक्ष होकर सरकारी एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि की पैमाइश कराई जाए तो न जाने कितने भू-माफिया के काले करतूत सामने आ जाएंगे। मगर, यह कार्रवाई करने से जिम्मेदार कतरा रहे हैं। केवल कुछ शिकायतों पर दबाव बनने के बाद ही प्रभावशाली कार्रवाई हो पा रही है।
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तीन दिन में दो सौ से अधिक शिकायत हुई दर्ज
डीएम कार्यालय में तीन दिन में 200 से अधिक लोगों की शिकायतें दर्ज हुई हैं। इसमें अधिकांश जमीन विवाद से संबंधित हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मुख्यमंत्री पोर्टल और भू-माफिया पोर्टल पर शिकायत के बाद भी मौके पर निस्तारण नहीं किया जा रहा है। इसके कारण डीएम, एसडीएम और तहसीलदार कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है। कुछ मामलों में तहसील के निचले स्तर के जिम्मेदारों पर मनमानी के आरोप भी लगे हैं।
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केस- एक
पूव सैनिक रामनयन का कहना है कि आईजीआरएस पोर्टल, डीएम, मुख्यमंत्री से शिकायत का सीधा मतलब निचले स्तर पर शिकायतकर्ता की सुनवाई नहीं हुई है। बावजूद इसके शिकायत स्थानांतरित होकर उन्हीं के पास पहुंच रही जिनसे न्याय की उम्मीद नहीं है। मेरे साथ भी यही हुआ। मेरे पट्टे की भूमि को दबंग कब्जा करना चाह रहे हैं। दबंगों ने बुलडोजर तक चलवा दिया। लेखपाल, कानूनगो प्रकरण जानकार भी अनजान बने हुए हैं। संपूर्ण समाधान दिवस, आईजीआरएस पोर्टल पर भी शिकायत कर चुके हैं। ऑनलाइन रिपोर्ट में मामला निस्तारित हो चुका है।
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केस- दो
हरदिया के सरयू प्रसाद का कहना है कि वह दिव्यांग है। धारा 24 के तहत पक्की पैमाइश के लिए आवेदन किया था। पत्थर नसब का आदेश हुए तीन साल बीत चुका है, लेकिन अब तक राजस्व कर्मियो ने पत्थर नसब नहीं कराया। जनसुनवाई पोर्टल से लेकर तहसीलदार, एसडीएम, डीएम सभी को प्रार्थनापत्र दे चुके हैं। घूम फिरकर मामला लेखपाल और कानूनगो के पास आ रहा है और निस्तारण की एक जैसी रिपोर्ट लगा दी जा रही है। समस्या बरकरार है।
डीएम ने दिए नियमित सुनवाई के दिए आदेश
डीएम अंद्रा वामसी ने जमीन संबंधी मामलों के निस्तारण में तेजी लाने के लिए राजस्व एवं चकबंदी विभाग के अधिकारियों को नियमित सुनवाई के निर्देश दिए हैं। इस सप्ताह से राजस्व से संबंधित न्यायालयों में नियमित सुनवाई शुरू हो गई है। जिले स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग कराई जा रही है। माह के अंत में लंबित मुकदमों की समीक्षा होगी।
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कोट
एंटी भू-माफिया व आईजीआरएस पोर्टल पर निस्तारित होने वाली शिकायतों की क्रास चेकिंग भी कराई जाएगी। यदि किसी मामले में बिना जांच के निस्तारण की रिपोर्ट पाई गई तो संबंधित पर कार्रवाई होगी। इसके अलावा नए सिरे भू-माफिया भी चिह्नित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
-अंद्रा वामसी, डीएम