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Basti News: चैत्र पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने स्नानकर ग्रहण किया लिट्टी-चोखा का प्रसाद

Fri, 07 Apr 2023 12:48 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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बस्ती/परशुरामपुर। चैत्र पूर्णिमा पर भगवान श्रीराम की उद्भव स्थली मखौड़ा धाम में मनोरमा नदी के तट पर श्रद्धालुओं ने स्नान कर दान-पुण्य किया। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में ही लिट्टी-चोखा बना कर प्रसाद ग्रहण किया। परिसर में इस साल की भव्य मेला लगा। स्थानीय लोगों ने जमकर खरीदारी की।
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मेले में झूला, मिट्टी व लकड़ी के बर्तन, प्रसाधन की दुकानें आकर्षण का केंद्र रहीं। अयोध्या धाम बड़ा स्थान दशरथ महल के महंत बिंदुगद्दाचार्य देवेंद्र प्रसादाचार्य ने बताया कि मखौड़ा धाम स्थित पवित्र मनोरमा नदी में स्नान करने से मनुष्य का दैहिक, दैविक, भौतिक हर तरह का पाप नष्ट हो जाता है। क्षेत्र के विभिन्न गांवों से जोगीरा नृत्य की टोलियां मखौड़ा धाम पहुंचीं। मेले में जोगीरा नृत्य के बाद सभी ने मनोरमा में स्नान किया।
टिनिच प्रतिनिधि के अनुसार, क्षेत्र के बारह क्षेत्र धाम में कुआनो के तट पर श्रद्धालुओं ने स्नान का गोदान किया। लालगंज प्रतिनिधि के अनुसार, मनोरमा-कुआनो के संगम तट पर श्रद्धालुओं ने स्नान कर दान-पुण्य किया। तट पर भोर में ही श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। रामायण में वर्णित है कि महर्षि उद्दालक मुनि की तपोभूमि मनोरमा-कुआनो के संगम तट पर श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ चैत्र पूर्णिमा के दिन स्नान कर लिट्टी चोखा बनाकर खाया और यहीं रात्रि विश्राम किया था। सात अप्रैल से यहां मेले का आयोजन शुरू होगा जो पांच दिनों तक चलेगा। चौकी प्रभारी छोटे लाल सिंह ने बताया कि मेले की सुरक्षा में 50 सिपाही, 10 एसआई, 20 महिला सिपाही को तैनात किया गया है। दुबौलिया क्षेत्र के मनोरमा नदी के तट पर पंडूल घाट पर मेले का आयोजन हुआ। घाट पर मनोरमा नदी में स्नान कर दान पुण्य किया।
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मखौड़ा पहुंचा साधु-संतों का जत्था
परशुरामपुर। शुक्रवार को भोर से शुरू होने वाली चौरासी कोसी परिक्रमा के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से साधु-संतों की टोलियों के आने का सिलसिला बृहस्पतिवार देर शाम तक जारी रहा। परिक्रमा में शामिल होने के लिए हरिद्वार, ऋषिकेश, जोशीमठ, मध्यप्रदेश, झारखंड, बिहार, महाराष्ट्र आदि जगहों से श्रद्धालु चौरासी कोसी परिक्रमा में हिस्सा लेते हैं। मखौड़ा धाम मंदिर और अयोध्या दशरथ महल के महंत बिंदुगद्याचार्य देवेंद्र प्रसादाचार्य ने बताया कि चौरासी कोसी परिक्रमा से मनुष्य को चौरासी लाख योनियों में भटकने से मुक्ति मिलती है। संवाद
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