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डेंगू से जंग को खाली हाथ ब्लड बैंक....

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डेंगू फैला तो ब्लड बैंक से मदद की उम्मीद न करें
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बस्ती। डेंगू से जंग की तैयारी के लिए जहां अस्पताल प्रशासन व मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है वहीं ब्लड बैंक खाली है। यहां जिला चिकित्सालय में मात्र 42 यूनिट रक्त है। चूंकि यहां सपरेशन यूनिट न होने के कारण मांगे जाने पर सीधे खून दिया जाता है वहीं मेडिकल कॉलेज के सपरेशन यूनिट का भंडार करीब-करीब खाली है। यहां केवल 16 यूनिट प्लेटलेट्स है।
उल्लेखनीय है कि डेंगू के जिले में अब तक 46 मरीज मिल चुके हैं। जबकि दो की मौत हुई है। यह अलग बात है कि प्रशासन डेंगू से मौत को लखनऊ व गोंडा में बता रहा है, मगर डेंगू लोगों पर भारी पड़ रहा है। चिकित्सकों की मानें तो डेेंगू में शरीर से प्लेटलेट्स व प्लाजमा की कमी होती है। अपने जिले में निजी ब्लडबैंक को छोड़ दिया जाए तो सरकारी चिकित्सालय में केवल मेडिकल कॉलेज में ही सपरेशन यूनिट स्थापित है। ऐसे में वहां खून से प्लाजमा व प्लेटलेट्स अलग कर उसे जरूरत पर उपलब्ध कराया जाता है।
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डेंगू के प्रभाव को देखते हुए प्रशासन जहां अस्पतालों में दवा आदि की व्यवस्था करा चुका है, मगर अब तक ब्लडबैंक इस दिशा में कोई तैयारी नहीं कर रहा है। क्योंकि जिला अस्पताल से तो केवल खून की आपूर्ति हो सकती है, जबकि मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय कैली में प्लेटलेट्स व प्लाजमा दोनो की जरूरत पूरी होती है। एक ओर जहां जिला अस्पताल में केवल 42 यूनिट खून है तो ओपेक चिकित्सालय कैली के ब्लडबैंक के भंडार में केवल 16 यूनिट प्लेटलेट्स उपलब्ध है, जबकि 200 यूनिट प्लाजमा मौजूद है।
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छह माह में जिला अस्पताल से दिया 172 यूनिट ब्लड
ब्लड बैंक के इंचार्ज डॉ. दीपक श्रीवास्तव ने कहा कि जननी सुरक्षा योजना, एनआरसी में भर्ती मरीज सहित अन्य जरूरतमंदों को ब्लड बैंक से पूरी तरह निशुल्क खून मुहैया कराया जा रहा है। छह माह में जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से 172 यूनिट खून ऐसे मरीजों को मुहैया कराया जा चुका है।
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रक्तदान के लिए किया जा रहा प्रेरित
ओपेक चिकित्सालय कैली के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. स्वराज शर्मा ने कहा कि रक्तदान के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। सपरेशन यूनिट के माध्यम से खून से प्लेटलेट्स व प्लाजमा अलग कर उसे जरूरतमंदों को दिया जाता है। फिलहाल भंडारण में प्लेटलेटस केवल 16 यूनिट रह गई है।
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