बस्ती। हजरत मोहम्मद पब्लिक स्कूल बड़ौगी रामनगर के प्रबंधक ने कलेक्ट्रेट परिसर में ही शनिवार को बच्चों की कक्षा लगा दी। स्कूल की मान्यता में हेरफेर और घूस मांगने का आरोप लगाते हुए उन्होंने विरोध प्रदर्शन का यह तरीका अपनाया। इसके लिए चार घंटे तक परिसर में बच्चों को दरी पर बैठाकर पढ़ाया गया। मौके पर दो एसडीएम और दो खंड शिक्षा अधिकारी प्रबंधक को मनाने पहुंचे। लेकिन प्रबंधक सहित शिक्षक बीएसए और एक लिपिक पर कार्रवाई के साथ ही मान्यता पाने वाले स्कूलों की जांच कराने पर अड़े रहे। अफसरों ने कार्रवाई का भरोसा दिलाकर बच्चों और प्रबंधक को वापस भेजा।
स्कूल के प्रबंधक महफूज अली ने बताया कि उन्होंने जूनियर हाईस्कूल की मान्यता के लिए बीएसए कार्यालय में आवेदन किया था। बीएसए, रामनगर के बीईओ तथा संबंधित लिपिक पर आरोप लगाते हुए कहा कि मान्यता के लिए उनसे भारी रकम की मांग की गई। जब इन्कार किया तो मान्यता नहीं दी गई। खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा लगातार स्कूल बंद कराने की धमकी दी जा रही है। जब इसकी शिकायत बीएसए से की गई तो वह भी नाराज हो गए। आरोप लगाया कि उनके खिलाफ पूरा बीएसए कार्यालय मिलकर साजिश कर रहा है।
....तो बच्चों को बनाया जरिया
स्कूल की मान्यता के लिए ठंड के मौसम में रामनगर से बच्चों को कलेक्ट्रेट परिसर लाए जाने की कलेक्ट्रेट में चर्चा रही। एसडीएम एससी शर्मा व एसडीएम सदर हरिश्चंद्र सिंह सहित मौके पर रहे खंड शिक्षा अधिकारी अखिलेश सिंह व विजय ओझा तथा अन्य लोगों ने इसे गलत बताया। कहा कि यह कानूनन अपराध है। इससे बच्चों का मानसिक शोषण और उत्पीड़न हुआ। कई लोग तो इसके लिए स्कूल प्रबंधक के खिलाफ ही कार्रवाई करने की मांग कर रहे थे।
बीएसए से तलब की गई पत्रावली : डीएम
डीएम सुशील कुमार मौर्य ने बताया कि इस मामले में बीएसए से पत्रावली तलब की गई है लेकिन बच्चों को इतनी दूर से कलेक्ट्रेट तक ले आना और मान्यता के लिए उन्हें हथियार बनाना नियम विरुद्घ है। इसके लिए स्कूल प्रबंधक के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
नहीं ली थी प्रदर्शन की अनुमति : एसडीएम
एसडीएम सदर हरिश्चंद्र सिंह का कहना है कि स्कूल प्रबंधक ने बच्चों के साथ धरना-प्रदर्शन करने के लिए पहले से कोई सूचना नहीं दी और न ही अनुमति ली थी। इतनी बड़ी संख्या में 40 किमी से अधिक दूर से बस में छोटे बच्चों को लेकर आना नियम के खिलाफ है। अगर रास्ते में कोई हादसा हो जाता तो कौन जिम्मेदार होता? ज्ञापन लेकर पूरे मामले से डीएम को अवगत कराया गया है।
30 दिसंबर को ही दिया था नोटिस : बीएसए
बीएसए सत्येंद्र कुमार सिंह ने बताया कि बड़ौगी के प्रबंधक को मान्यता न मिलने का कारण बताते हुए उन्हें 30 दिसंबर, 2017 को ही पंजीकृत डाक के जरिए जानकारी दे दी गई थी। स्कूल प्रबंधक को मान्यता की शर्तें पूरी करने के बाद पत्रावली देने की जानकारी दी गई थी। दो कमरों की कमी बताते हुए उसका निर्माण कराने को कहा गया है। शासन का आदेश है कि अगर कोई स्कूल बिना मान्यता के संचालित हो रहा है तो उसे बंद कराया जाए।