बस्ती। अखिल भारतीय क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक एंप्लाइज एसोसिएशन ने ग्रामीण बैंकों में पिछले कई वर्षों से कार्यरत अस्थाई, दैनिक वेतनभोगी एवं अनुबंध कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतनमान एवं सेवा नियमितीकरण के लिए आवाज उठाई है। केंद्र सरकार से मांग की गई है कि समान कार्य के लिए समान वेतन सिद्धांत के अनुसार दस वर्ष से अधिक सेवा पूर्ण कर चुके ऐसे कर्मचारियों का सेवा नियमितीकरण करने के साथ वेतनमान निर्धारित किया जाएगा। अरबिया सेंट्रल कमेटी के सदस्य केके श्रीवास्तव ने कर्मचारियों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि देश भर में 23 हजार से अधिक शाखाओं वाले 28 ग्रामीण बैंकों में सब-स्टाफ की नियुक्तियां 15 से 25 वर्षों के बीच नहीं हुई है। परिणामस्वरूप सेवानिवृत्ति और विस्तार के कारण स्थायी पद रिक्त हो गए। जिन पर बैंकों ने न्यूनतम वेतन से भी कम मानदेय पर अस्थायी कर्मियों को लगा रखा है। यह श्रम कानूनों का उल्लंघन है। कहा कि आंध्र प्रदेश ग्रामीण विकास बैंक एवं अन्य बैंकों में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसे कर्मचारियों के पक्ष में ऐतिहासिक निर्णय दिए हैं। इसके आधार पर कई सौ अस्थायी कर्मियों का नियमितीकरण हो चुका है। इसी प्रकार का एक एकमुश्त राष्ट्रव्यापी निर्णय सभी ग्रामीण बैंकों पर लागू किया जाना चाहिए। जिससे लंबित मुकदमों का अंत हो।